इरफान अंसारी रिपोर्टर
आपत्ति करते हुये भारतीय जनता पार्टी के पैर्यवर्धन शर्मा ने जो टिप्पणी की है वो अशोभनीय और अमर्यादित है। धैर्यवर्धन केरल की बात ऐसे कर रहे है जैसे कैरल किसी अन्य देश का नाम हो, धैर्यवर्धन का यह भाव नंदनीय है। धैर्यवर्धन को यह मालूम होना चाहिए कि केरल भारत का 100 प्रतिशत साक्षर राज्य और भारत का अविभाज्य अंग है हत्याओं को सामप्रदायिक रंग नही दिया जाना चाहिए। अगर जरा सी भी मानवियता है तो 90 पण्डितो की हत्या के साथ 1500 मुस्लिमो की भी बात फिल्म में क्यों नहीं दिखाई गई फिल्म पर भाजपा का उत्साह तो ऐसा है जैसे फिल्म की प्रयोजक खुद भाजपा ही है। पण्डितों की हत्या पर राजनीति के बजाय उनके पुर्नवास के प्रयास होना चाहिए फिल्म को लेकर जो प्रतिक्रिया के के चाहिए। सामने आ रही है वो नफरत को रेखांकित करती है। धैर्यवर्धन बताये कि जब कश्मीरी पण्डितो का कश्मीर से निकाला जा रहा था उस समय भाजपा क्या कर रही थी। जबकि केन्द्र में सत्ता उसी की थी। तीन दशक बाद याद आई भी तो राजनीति करने के लिये।

धैर्यवर्धन को चाहिये कि वो प्रदेश ही में आने वाले शिवपुरी जिले में कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को खत्म करने के लिये अपनी भाजपा सरकार के साथ मिलकर समाप्त करने पर ध्यान दें।
प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या के होते हुये उन्हें SDPI द्वारा किये गये शांतिपूर्ण ज्ञापन पर चुभन होना उनकी राजनैतिक और मानसिक दिवालिया पन को दर्शाता है।

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