ब्यूरो चीफ पंडित नंदन शर्मा
हिन्दू धर्म का पवित्र पर्व नवरात्रि के तीसरे व चौथे दिन चेत्र शुक्ल तृतीया से गणगौर पर्व की होगी शुरुआत , ग्राम पिपली में निकली फुलपाती





पिपली गंधवानी – गणगौर उत्सव चेत्र शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाता है गण का अर्थ है शिव और गौर का अर्थ है पार्वती इस दिन दिव्य युगल की महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है ईस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है यह पर्व राजस्थान गुजरात मध्य प्रदेश हरियाणा के कई क्षेत्रों में गौरी त्रतिया के रूप में मनाया जाता है यह पर्व गणगौर पर्व के रूप में लोकप्रिय है ।
मप्र के निमाडाँचल क्षेत्र में गणगौर पर्व दीपावली पर्व की तरह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है ।
प्रसिद्ध गणगौर पर्व ग्राम पिपली में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मनाया गया है ।
ओर यह पर्व सिर्वी समाज का मुख्य पर्व है । सिर्वी समाज इस पर्व को दीपावली के पर्व की तरह मनाता है घरों में रंग रोगन किया जाता है । सिर्वी समाज द्वारा नवरात्री के तृतीया से प्रारम्भ होता है जो पुरे 4 दिवस शिव पार्वती के रूप में रथ की स्थापना करते है ।
मान्यता है की माता पार्वती और भोलेनाथ को बेटी जवाई के रूप में माना जाता है ।
इस मुख्य त्योहार पर महिलाएं उपवास कर माता पार्वती ओर भोलेनाथ के स्वरूप की प्रतिदिन सुबह शाम सेवा पूजा करती है ।
नवरात्री के आगमन के पूर्व समाज द्वारा बच्चे और महिलाएं फुलपाती के रूप में छोटे छोटे बच्चियों दुवारा दूल्हा दुल्हन बनते है और फूल पाती लाते है हर घर से ढोल बाजे के साथ निकलते है ।
ग्राम पिपली का गणगौर पर्व सम्पूर्ण भारत मे प्रसिद्ध है इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है । पिपली से ब्यूरो चीफ कैलाश बर्फा की खबर

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