महाराष्ट्र में सियासी संकट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. उद्धव ठाकरे को पिछले दिनों मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था तो शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे ने बीजेपी से हाथ मिलाकर राज्य में सरकार बनाई और खुद मुख्यमंत्री बने. इस बीच उद्धव ठाकरे और शिंदे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं कुछ याचिकाओं पर आज सुनवाई हो रही है. इस दौरान उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश की हैं. उन्होंने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर यह केस मंजूर किया जाता है तो देश में हर चुनी हुई सरकार के गिराए जाने का खतरा बढ़ जाएगा

वहीं दूसरी ओर शिंदे गुट की ओर से वकील हरीश साल्वे ने दलीलें पेश की हैं. उन्होंने इस दौरान कहा है कि अब अयोग्यता की कार्यवाही लागू नहीं होती. अयोग्यता की कार्यवाही पूरे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. जो तत्कालीन स्पीकर ने तब शुरू की थी. जबकी विधायकों ने उसको हटाने का अविश्वास प्रस्ताव दिया था. हरीश साल्वे ने इस दौरान कहा कि वह उद्धव गुट की ओर से दायर याचिकाओं पर हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं. ऐसे में उसके लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नई याचिका भी दायर हुई है, जो हमें नहीं मिली
सुप्रीम कोर्ट ने साल्वे से कहा कि ये राजनीतिक संवेदनशील केस है, सवाल है कि अगर स्प्लिट नहीं हुआ है तो इसका क्या प्रभाव हुआ है? इस पर साल्वे ने कहा कि इसमें अयोग्यता का मामला नहीं है. एक आदमी जो अपने समर्थन में 20 लोग भी नहीं कर सकता, वो कोर्ट से राहत की उम्मीद कर रहा है.

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