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Dharmendra Singh

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April 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

मनीष ऋषीश्वर की रिपोर्ट

शिकायत के बाद भी एनएचएम संचालक म.प्र. के आदेश के अनुपालन में लगा दिया लगभग 1 महीने का समय

भिण्ड
जिला अस्पताल में इन दिनों वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं वर्तमान सी.एम.एच.ओ.
डॉ यूपीएस कुशवाह की मनमर्जी के चर्चे जिला अस्पताल में जोरों पर है उसमें भी नियम विरुद्ध तरीके से प्रभार देना या प्रभार वापस ले लेना उनके करीबी होने पर निर्भर करता है,वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश को ताक पर रखना शायद साहब का शगल बन गया है।
मामला जिला अस्पताल में प्रभारी के तौर पर तैनात जिला क्षय अधिकारी डॉ ए.डी.शाक्य से नियम विरुद्ध तरीके से प्रभार वापस लेकर डॉ जे.एस. राजपूत को सौंपने का है
दरअसल 15 जुलाई 2022 को स्वास्थ्य आयुक्त सुदामा पी खाडे के द्वारा प्रशासनिक पदों के प्रभार में पदस्थ विशेषज्ञ/प्रभारी विशेषज्ञ या पीजी चिकित्सा अधिकारियों से क्लीनिकल कार्य लिए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया था जिसमें मूल रूप से समस्त चिकित्सा विशेषज्ञों से केवल चिकित्सकीय सेवाएं लेने का आदेश दिया गया था और चिकित्सा विशेषज्ञों को सभी प्रकार के प्रभारों से भी मुक्त रखने हेतु आदेशित किया गया था,स्वास्थ्य आयुक्त के आदेश के आधार पर सीएमएचओ द्वारा 21 जुलाई 2022 को 9 प्रभारियों समेत जिला क्षय अधिकारी का प्रभार डॉ ए.डी. शाक्य से वापस लेकर डॉक्टर जे.एस. राजपूत को तो सौंप दिया गया,जिसकी शिकायत जब डॉ ए.डी. शाक्य द्वारा टी.वी. सैल में की गई तो एन.एच.एम. संचालक प्रियंका दास के द्वारा 25 जुलाई 2022 को आदेश क्रमांक एन.टी.ई.पी/एफ-/22/739 के माध्यम यह भी यह आदेश दिया गया कि स्वास्थ आयुक्त के आदेश दिनांक 15 जुलाई 2022 के अनुपालन में सभी सीएमएचओ अपने जिले में जिला क्षय अधिकारी का प्रभार देने हेतु योग्य चिकित्सा अधिकारी का प्रस्ताव तीन दिवस के भीतर राज्य क्षय कार्यालय को प्रेषित करें उपरोक्त प्रक्रिया जब तक पूर्ण नहीं हो जाती तब तक वर्तमान जिला अधिकारी से ही नवीन प्रभार के साथ-साथ जिला अधिकारी का कार्य कराना सुनिश्चित करें,एनएचएम संचालक मध्य प्रदेश के आदेश के बावजूद सीएमएचओ द्वारा कई दिनों तक डॉ ए.डी. शाक्य का प्रभार उन्हें वापस नहीं दिया गया जब इस संबंध में रिपोर्टर द्वारा सीएमएचओ महोदय से एनएचएम संचालक मध्य प्रदेश के आदेश के अनुपालन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर बात खत्म कर दी कि जो प्रभार बदला गया है उसकी जानकारी हमारे द्वारा एन.एच.एम. कार्यालय भी भेज दी गई है। चर्चा के दौरान बीच में उन्होंने यहां तक कह दिया कि हेल्थ कमिश्नर का आदेश बड़ा होता है या स्टेट टी.बी. ऑफिसर का? जबकि संचालक एनएचएम म.प्र. का आदेश आयुक्त स्वास्थ्य विभाग म.प्र.के आदेश के अनुपालन में ही जारी किया गया था,यह सब साहब की मनमानी को उजागर करता है।

लगभग 1 महीने बाद वापस करना पड़ा डीटीओ का प्रभार

लगभग 1 महीने बाद डीटीओ (जिला क्षय अधिकारी) का प्रभार डॉ ए.डी. शाक्य को वापस मिलने के बाद जब रिपोर्टर ने डॉ शाक्य से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि उन्हें सीएमएचओ द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से हटा दिया गया था जिसकी शिकायत उन्होंने टी.बी. सैल भोपाल में की थी जिसके परिपालन में आज लगभग एक महीने बाद उन्हें डीटीओ का चार्ज वापस दिया गया है।

डी.एच.ओ-2 का नियम-विरुद्ध प्रभार दिए जाने के संबंध में अब बनाया गाइडलाइन का बहाना

जिला चिकित्सालय में पैथोलॉजिस्ट डॉ देवेश शर्मा पर डी.एच.ओ.-2 (जिला स्वास्थ्य अधिकारी-2) का प्रभार अभी भी बना हुआ है जबकि आयुक्त स्वास्थ्य विभाग के आदेश क्रमांक 1155 के अनुपालन में कुल 9 लोगों से प्रभार वापस लेकर उन्हें चिकित्सकीय कार्य दिया गया है। इस बारे में जब सीएमएचओ से पूछा गया था तो उन्होंने डीएचओ-2 की पोस्ट को नॉनक्लिनिकल बताकर सवाल टालने का प्रयास किया था,आज दोबारा पूछे जाने पर बताया कि उनके द्वारा भोपाल कार्यालय से गाइडलाइन मांगी गई हैं गाइडलाइन आने के बाद ही प्रभार में बदलाव किया जाएगा।

सी.एम.एच.ओ की कार्यशैली का दोहरा रवैया
चिकित्सकों को प्रभार देने या चिकित्सा विशेषज्ञों से प्रभार वापस लेने में सीएमएचओ महोदय की कार्यशैली का दोहरा रवैया देखने को मिला है। जहां एक ओर डॉ शाक्य से नियम विरुद्ध तरीके से प्रभार वापस ले लिया गया था, जिसे वापस लेने के लिए श्री शाक्य को तमाम शिकायतें करनी पड़ी वहीं दूसरी ओर डॉ देवेश शर्मा पर डी.एच.ओ-2 का प्रभार नियम विरुद्ध तरीके से जस का तस बना हुआ है और वहां गाइडलाइन मंगाए जाने का बहाना बनाया जा रहा है खैर अब दोनों ही मामलों में सीएमएचओ के अलग-अलग बहाने है डॉ ए डी शाक्य के मामले में जहां
एन.एच.एम संचालक का आदेश उनके संज्ञान में नहीं आ पाया था तो वही डी.एच.ओ-2 का प्रभार वापस लेने से अस्पताल में संचालित सभी प्रोग्राम बंद होने का खतरा दिखाई पड़ता है,यह सब निश्चित ही महोदय की मनमानी का जीता जागता उदाहरण है।

इनका कहना है

सीएमएचओ महोदय द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से जिला क्षय अधिकारी का प्रभार मुझसे हटाया गया था जिसकी शिकायत उपरांत मुझे प्रभार वापस किया गया है।

डॉ ए.डी. शाक्य
जिला क्षय अधिकारी
जिला चिकित्सालय भिंड

पहले मुझे एनएचएम संचालक के आदेश की जानकारी नहीं थी रिमाइंडर मिलने के उपरांत प्रभार वापस किया गया है।

यूपीएस कुशवाह
सी.एम.एच.ओ
जिला चिकित्सालय भिंड