Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 का मुकाबला बड़ा रोचक होने वाला है।बागरी युवा शक्ति आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव में 20 के लिए अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों और समाज के प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
विस्तार
एमपी में बागरी समाज वोटरों को साधने में जुटी बीजेपी-कांग्रेस को चुनौती देने बागरी युवा शक्ति (बागरी समाज ) ने भी तैयारी शुरू कर दी है। बागरी समाज आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव में 20 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों और समाज के प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
मध्य प्रदेश में अभी बागरी समाज से एकमात्र विधायक शिवदयाल बागरी हैं। मध्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों से बागरी युवा शक्ति(बागरी समाज) संगठन के निर्वाचित सरपंच, जिला जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत अध्यक्ष नगर निगम में जीत हासिल की।
कपिलसिंह सोलंकी इन्दौर बागरी युवा शक्ति अध्यक्ष ने बताया कि गांव की सरकार से संसद तक राजनीति में बागरी युवाओं की हिस्सेदारी एवं बागरी युवा शक्ति मिशन युवा नेतृत्व के लिए आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर रणनीति तैयार की गई। कपिलसिंह सोलंकी ने बताया कि संगठन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और प्रभाव रखने वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इसके लिए अभी से विधानसभा स्तर पर उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करना, चुनाव की रणनीति तैयार करना, बूथ स्तर की कमेटियां गठित करना, सभी पंचायतों में बागरी युवा शक्ति युवाओं द्वारा सामाजिक, राजनीतिक एवं संवैधानिक जनजागरूकता फैलाना, पंचायत स्तर की चुनावी टीम गठित करना तय किया गया।
इसलिए बड़ी कांग्रेस-बीजेपी की मुसीबत
प्रदेश में बागरी समाज की बड़ी आबादी होने से 230 विधानसभा में से 30 सीटों पर उनका सीधा प्रभाव है ऐसे में इन सीटों पर बागरी समाज की संख्या बढ़ती है तो बीजेपी और कांग्रेस के लिए सरकार बनाने की चुनौती होगी। बता दें बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दल बागरी समाज को वोटरों को साधने में जुटे हुए है।
बागरी युवा शक्ति अध्यक्ष कपिलसिंह सोलंकी बताया कि देश की आजादी के 75 साल हो जाने के बाद भी हमारे मध्यप्रदेश में बागरी जाति विकास के बारे में हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देती है ! क्या सच में आजादी के 75 साल हो जाने के बाद आज भी देश के विशेषकर ग्रामीण अंचलों में बागरी समाज सहीं मायने में आजाद हो पाए हैं ? ये प्रश्नचिन्ह हम सबके सामने है !
बागरी समाज के परिवार के साथ अत्याचार होता है राज्य सरकारों के विकास के लंबे-चौड़े दावों की पोल खुल जाती है।बागरी समाज क्या वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जाता है बागरी समाज अजादी 75 साल बाद भी राजनीतिक दलों को वोट बैंक ही लगता है