Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

ब्यूरो चीप भुजबल जोगी

सागर में साल 2022 का अंतिम सूर्य ग्रहण दोपहर बाद 2 बजकर 40 मिनट से शुरू हुआऔर शाम 6 बजकर 29 मिनट पर खत्म हुआ, इस सूर्य ग्रहण की अवधि लगभग 4 घंटे रही। सागर में सूर्य ग्रहण को लेकर जबरदस्त उत्त्साह देखा गया, इस दौरान धार्मिक कार्य स्थगित रहे , मंदिरो के कपाट बंद रहे और विज्ञान प्रेमियों ने सूर्य ग्रहण देखा। ग्रहण 27 साल बाद दीवाली के बाद पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया था। लोगो ने मंत्रो का पाठ किया।

सूर्य ग्रहण को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. इस कथा के अनुसार जब देवताओं और दैत्यों के बीच समुद्र मंथन शुरू हुआ तो उसमें से अमृत का कलश भी निकला.
देवताओं और दैत्यों में अमृत कलश को लेकर विवाद शुरू हो गया. देवताओं को चिंता थी कि यदि अमृत दैत्यों ने पी लिया तो दैत्य अमर हो जाएंगे और हर जगह इनका राज्य हो जाएगा. तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप रखा और दैत्यों से अमृत का कलश लेकर देवताओं को अमृतपान कर दिया.
लेकिन देवताओं की पक्ति में स्वरभानु नाम का एक राक्षस भी रूप बदलकर छिप कर बैठ गया. चंद्रमा और सूर्य ने स्वरभानु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को पूरी बात बता दी, यह बात सुनकर तुरंत विष्णु भगवान ने सुर्दशन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया.
लेकिन तब तक अमृत की बूंद गले से नीचे उतर चुकी थी. इसलिए सिर और धड़ अलग हो जानें के बाद भी जीवित रहा. बाद में सिर राहु और केतु बन गए. राहु केतु इसी बात का बदला लेने के लिए चंद्र और सूर्य पर समय समय पर आक्रमण करते हैं. इसी क्रिया को ग्रहण कहते हैं।
विज्ञान के अनुसार जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक ही सीध में आ जाते हैं सूर्य ग्रहण लगता है.लेकिन इसके पीछे कुछ पौराणिक कथाएं भी हैं. मान्यता है कि राहु केतु के कारण ग्रहण की स्थिति बनती है।
डीपीएस स्कूल के छात्र ईशान जैन ने बताया की पहली बार सूर्य ग्रहण एक्सरे की डबल परत लगाकर देखने पर बहुत अच्छा लगा। प्रमोद बारदाना ने कहा कि अपने नाती पोते के साथ जीवन मे पहली बार सूर्य ग्रहण देखा। । डॉ हरिसिंह गौर विश्विद्यालय के उप पुस्तकालय अधिकारी डॉ संजीव सराफ ने बताया कि भारतीय विज्ञान अद्भुत रहा है, हमारे ग्रंथो में ग्रहण की सटीक व्याखा की गई हैं।
कलेक्टर दीपक आर्य ने बताया कि सागर महान शिक्षाविद डॉ हरिसिंह गौर की जन्मभूमि है और पूरे विश्व मे एकाकी दान से स्थापित विश्विद्यालय, मेरा प्रयास रहेगा कि सागर में इसके अध्ययन का कोई केंद्र स्थापित हो ताकि विज्ञान और अध्यात्म के सही पक्ष भारतीय संस्कारो के साथ प्रवाहमान हो सके।