एस पाटीदार रिपोर्टर




देश के आदिवासियों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धरोहर और उनके द्वारा राष्ट्र के निर्माण में दिए गए योगदान को याद करने के लिए केंद्र सरकार ने "धरती आबा " बिरसा मुंडा जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप मे मनाई गई । उसी के तारतम्य मे मध्यप्रदेश राज्य के धार जिले की मनावर की कृषि उपज मंडी मे 15 नवम्बर को बिरसा मुंडा की 147 वी जयंती पर मंडी प्रांगण में "जनजाति गोरव दिवस " के कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।जनजाति वनांचल से बड़ी संख्या में युवक और युवतियां नृत्य करते हुए शामिल हुई । सीएमसीएलडीपी मेंटर्स के प्रवक्ता पूर्णिमा मुखर्जी कहा कि कम उम्र मे ही बाल स्वरूप बिरसा मुंडा को राष्ट्र के प्रति भावना जागृत हो गयी थी। 25 वर्ष की उम्र में ही बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से मुकाबला कर भारत से भगाया था और गुलामी की दास्तां को छोड़कर हम भारतवासी स्वतंत्र हुए थे। आज का दिन ऐतिहासिक दिन है । इस दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बिरसा मुंडा के जीवन चरित्र का उल्लेख भी किया ।जनजाति परंपरा और रीति-रिवाजों के बारे में जानकारी दी। कुछ जनजाति लोगों ने " पुरानी पुरखों की निशानी को छोड़कर नये परिवेश मे पश्चिम देशों की सभ्यता के अनुसार जीवन व्यतीत " करने लग गए है, बताया गया। मनावर कृषि मंडी में जनजातीय जन अभियान परिषद की एम .पी .एम. सी. एल .डी . की पूर्णिमा मुखर्जी,मनोहर मंडलोई, पन्नालाल वास्केल, एवम् नवाकुर संस्था से शिवराम मंडलोई और सीएमसीएलडीपी बी. एस. डब्ल्यू स्टूडेंट्स एवम् एम .एस .डब्ल्यू के समस्त स्टूडेन्टो ने बढ़- चढ़कर कर कार्यक्रम मे हिस्सा लिया। तथा भारत देश के नक्क्षे की रंगीन आकृतियां बनायी गई।
BYTE :- पूर्णिमा मुखर्जी द्वारा

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