महेंद्र चौहान रिपोर्टर

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा पैसा एक्ट कानून बनाया गया है। जिसमें प्रावधान रखा गया की ग्राम पंचायत स्तर की समितियों के सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना किसी भी कार्य योजना को स्वीकृति नहीं दी जा सकती है फिर भी लगता है कि यह योजना केवल कागजों पर ही बनी है।धरातल पर इसकी कोई पूछ परख नहीं हो रही है, इसी मामले को लेकर हो रहे वायरल ऑडियो में सतीस अजनार ग्राम पंचायत पारा के पेसा एक्ट कानून के ग्राम सभा समिति के ग्राम पंचायत पारा के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी ग्राम सभा समिति के किसी भी सदस्य से किसी तरीके की बात किए बिना ही अपनी मनमानी कर रहे ग्राम पंचायत पारा के सरपंच, उपसरपंच और सचिव की शिकायत कलेक्टर महोदय से करने की बात कही जा रही है। क्योंकि ग्राम पंचायत पारा के अंतर्गत लगभग सभी कार्य बिना किसी ग्रामसभा के ही पारित हो जाते हैं। सरपंच, उपसरपंच और सचिव ही किसी भी कार्य योजना को अपने मन से बना कर पारित कर देते हैं।जिसका विरोध करने की बात उक्त ऑडियो में की जा रही है। और ग्राम पंचायत पारा के सभी पंचों को लेकर झाबुआ कलेक्टर से ग्राम पंचायत पारा के सरपंच, उप सरपंच और सचिव की भ्रष्टाचारी कार्यप्रणाली के बारे में शिकायत करने की बात कही जा रही है। अब देखना यह होगा कि सतीश अजनार के भाजपा से कांग्रेस में आने के बाद एवं पेसा एक्ट के ग्राम सभा समिति के अध्यक्ष होने के बाद कितनी भ्रष्टाचारी कार्य प्रणाली पर अंकुश लगा पाते है ।

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