शकील खान रिपोर्टर



मनावर । मौजूदा दौर में बेटा-बेटी मेंं अब फर्क नहीं रहा। जो काम बेटा कर सकता है, वही काम बेटी भी कर सकती हैं। काम चाहे घर का हो या घर की चारदीवारी से बाहर का। ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है।मनावर के सिंचाई विभाग के पुरव पदाधिकारी मनोहरलाल जायसवाल की बेटी की शादी कुछ वर्ष पहले खरगोन मे की गई थि जो कुछ वर्षो से मनावर मे विद्या पूर्ण कालोनी में अपने माता पिता के साथ रह रही थी।जो कुछ दिनो से स्वास्थ्य खराब था मनावर के वार्ड क्रमांक 3 की जायसवाल समाज की बेटी ने। सामाजिक बंधनों से मुक्त इस बेटी होने का फर्ज निभाते हुए अपनी मां को मुखाग्नि दी।दरअसल मनावर शहर में रहने वाली आस्था की मां का शनिवार को निधन हो गया था। स्वर्गीय भारती जायसवाल की बेटी ने शमशाान घाट में विधिविधान से अपनी मां का अंतिम संस्कार किया।एक मां-बेटी, तारणहार बनी । लेकिन मनावर शहर की जायसवाल समाज की बीटिया आस्था 12 वर्ष ने जो किया वे अनुकरणीय है। बीमार माता की सेवा में जुटी रही ।आस्था के सामने मां का देहांत होने के बाद प्रश्न था कि मुखाग्नि कौन देगा? अब ऐसी खबरें सनसनी बनने की बजाए स्वीकारोक्ति बनना चाहिए। देशभर में ऐसी घटनाएं चुनौती दे रही हैं। बदलते परिदृश्य में इस प्रथा पर किसी तरह का बंधन नहीं होना चाहिए।

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