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April 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

शकील खान रिपोर्टर


मनावर।आदिवासियों का एक करने वाले जनप्रतिनिधि सांसद विधायक व अन्य आदिवासी संगठनों के हितग्राही उन्होंने आज तक कभी अल्ट्राटेक कंपनी से पीड़ित आदिवासियों की सुध नहीं ली है जिराबाद डेम की नहर से सिंचित मान नदी की बाई तट नहर की वितरण नहर को माइनर क्रमांक 10 के 0 से 240 मि एव टोकी माइनर के आर डी 12860 मि से 13370 भी tk भुआर्जन ग्राम टैमरनी का का कुल शासकीय व निजी कुल रकबा 7.739 अधिग्रहण रकबा 0.930 हे। ग्राम टोकी माननहर बाई तट माइनर क्रमांक 10 से 240 मि से 170 मि तक के भुअर्जन ग्राम टोकी की शासकीय व निजी भूमि का कुलयोग 20.215 अधिग्रहण रकबा 2,400 है। 130 हेक्टर जमीन में आज सिंचाई नहीं हो रही हैं जिसकी माऊजा राशि 43 लाख बनती है जिसमे नहर निर्माण में करीब 44 लाख की राशि निर्माण के समय में लगी थी आज की लागत के हिसाब से 60 लाख रूपये बन रही है कुल राशि अल्ट्राटेक कंपनी को करीब 90 लाख समय अवधि में एन वीडी विभाग में राशि जमा करनी थी जो 2012 से 2023 तक जमा नही हो पाई हैं 13 यह राशि एन वी डी को प्राप्त नहीं हुई हे इतनी बड़ी राशि का 11 वर्ष का ब्याज का सीधा नुकसान विभाग को हो रहा है इसी कितनी ही अधेरे वाले राज आज भी अल्ट्राटेक के पेट में दफन है कोई जानकार ही सारी पोल निकाल सकता हे ऐसे ही जमीन जो आज करोड़ों के भाव की जमीन थी उनका दुरुपयोग कर खदानों में उसको समायोजित कर ली गई है 30 प्रतिशत जमीन है सिंचित क्षेत्र की अल्ट्राटेक ने अपने कब्जे में कर से 70% जमीन के किसान आज जिराबाद नहर के पानी से वंचित हो चुके हैं सरकार ने करोड़ों रूपये की सिंचाई योजना को हजारों एकड़ में बंद करदी जो जमीनें हजारों सालों से पानी को तरस रही थी उनको पानी मिला उनमें हरियाली दिखना चालू हुई और इस फैक्ट्री का उन जमीनों पर ग्रहण लग गया हजारों एकड़ बहु उपयोगी जमीनें आज खदानों में बदल गई है हजारों करोड़ की योजना आज उद्योग की भेट चढ़ गई है 3 पीढ़ी के बाद वहां के किसानों ने अपनी जमीनों में पानी देखा था आज वो जमीनें खाई में तब्दील हो रही है जिस क्षेत्र में फैक्ट्री जमीन अधिग्रहण की है उस क्षेत्र की बिजली काट दीगई है प्रधानमंत्री सड़क सभी के मार्ग भी अल्ट्राटेक ने बंद करवा दिए हैं 70% जिन किसानों की जमीन है आज भी अल्ट्राटेक ने अधिग्रहण नहीं की है वह किसान आज किस हाल में है किसी भी जनप्रतिनिधि में आज तक उनके बारे में नहीं सोचा है नहीं बिचारा है बड़ी-बड़ी बातें आदिवासियों के बारे में की जाती है जो जमीन है अधिग्रहण कर जिन्हें माउजे दिए गए उन लोगों का जीवन भी आज अस्त-व्यस्त हो चुका है उनके करोड़ों की जमीन है अल्ट्राटेक ने अधिग्रहण कर उन्हें मात्र 3 से ₹4 लाख प्रति बीघा के हिसाब से मावजा मिला हैं जिस कारण वह अधिग्रहण की जमीन वाला किसान 10 बीघा जमीन अल्ट्राटेक को देकर 5 बीघा जमीन भी नही खरीद पाया हैं उसके पास पैतृक संपत्ति थी इतनी जमीन वह किसी भी स्थिति में नहीं खरीद पाया और आज उसका जीवन भी नरक सा बन चुका है आने वाले समय में महंगाई को देखते हुए जो जमीन अल्ट्राटेक में देकर कम जमीन में अपना गुजारा वह व्यक्ति कैसे कर पाएगा जो जिन किसानों की जमीनें खदान व फैक्ट्री के आसपास है वो किसान भी किसान नहीं रहे या तो वहां मेड बंदी करदी गई है या उसने अपने खेतो में काम भी नही करने दिया जाता है आये दिन वहां खदानों में ब्लास्टिग होती है सायरन बजाकर किसानों को भगाया जाता है मार्ग बंद कर दिये जाते है समय पर किसान अपना कार्य नहीं कर पाता है उनकी परेशानी देखने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है प्रदूषण के कारण आसपास की सभी फसले खराब हो रही हैं