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Dharmendra Singh

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April 21, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

*दर्पण रंग समिति कि 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन* *नन्हे बच्चे सीख रहे अपनी मिट्टी के गीत अपना लोक संगीत* *रंगमंच से जोड़ने को प्रशिक्षण दे रहे रंगकर्मी दुर्गेश

*दर्पण रंग समिति कि 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन*

*नन्हे बच्चे सीख रहे अपनी मिट्टी के गीत अपना लोक संगीत*

*रंगमंच से जोड़ने को प्रशिक्षण दे रहे रंगकर्मी दुर्गेश*

रिपोर्टर संदीप शर्मा कटनी 
विवेकानंद एजुकेशन पब्लिक विद्यालय करौंदी में 10 मार्च से 30 मार्च तक बाल नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें दर्पण रंग समिति बरही के रंगकर्मी द्वारा बच्चो को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। नाटक, लोक संगीत, नृत्य का प्रशिक्षण दुर्गेश सोनी द्वारा दिया गया वहीं संस्था के कलाकार राहुल बर्मन , राजीव सोनी का भी सहयोग शामिल रहा। कार्यशाला का समापन समारोह करौंदी के विवेकानंद एजुकेशन पब्लिक स्कूल में 30 मार्च शनिवार को आयोजित किया गया। जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुर्गेश सोनी द्वारा निर्देशित लोकनृत्य, रंग-संगीत, लघु-नाट्य आदि का मंचन किया गया जिसे स्थानीय लोगों एवं स्कूल के समस्त स्टाफ ने खूब सराहा। रंगकर्मी दुर्गेश सोनी का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही रंगमंच की शिक्षा देना बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद है। हम इंसान हैं और रंगमंच इंसानियत सिखाता है और दिमाग का विस्तार करता है क्योंकि बहुत अच्छे नंबर लाने के चक्कर में बच्चों का बहुत कुछ पीछे छूट जाता है जैसे बच्चों के साथ खेलना, नाचना, गाना कुछ ऐसी एक्टिविटी जिसमें उनको मजा आए वे नहीं हो पाती, बस 97 प्रतिशत कैसे आयेंगे यही फितूर बच्चों और अभिभावकों में रहता है। थिएटर करने से बच्चों में हीन भावना खत्म होती है। घुटन से मुक्ति मिलती है एक अलग तरह का आत्मविश्वास अंदर आता है।रंगमंच रट्टा प्रवृ‌त्ति को खत्म करने में सहायक है क्योंकि उसमें बच्चा गतिविधियों में शामिल होकर खुद समझने की कोशिश ज्यादा करता है। उसमें शुरू से आत्मविश्वास आना शुरू हो जाता है क्योंकि रंगमंच में यह सब सिखाया जाता है।रंगमंच से नेतृत्व करने की क्षमता प्राप्त होती है क्योंकि बहुत सारी एक्सरसाइज ऐसी होती है कि हर बच्चे को नेतृत्व करने का अवसर देती है। रंगमंच से कल्पना शक्ति तेज होती है रस्सी को सांप, लकड़ी को तलवार या तूफान आंधी या बरसात आदि हर तरह की कल्पना के अवसर होते हैं। जिससे बच्चों की कल्पना शक्ति का विकास होता है। दुर्गेश सोनी आगे कहते हैं कि रंगमंच और अपनी लोक-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य को लेकर 28 दिसंबर 2015 में नाटक बसामन मामा के द्वारा दर्पण रंग समिति की नींव पड़ी। जिसमें हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह कार्यशाला हमारे लिए विशेष महत्व रखती है ।
विवेकानंद एजुकेशन पब्लिक स्कूल करौंदी के निदेशक श्री विनय साकेश जी का विशेष मार्गदर्शन संस्था को मिलता रहा तथा समस्त स्टाफ विद्यालय करौंदी का सहयोग निरंतर मिलता रहा।
दर्पण रंग समिति द्वारा 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के समापन समारोह में विवेकानंद एजुकेशन पब्लिक स्कूल करौंदी के निदेशक
श्री विनय कुमार साकेश, प्रधानाध्यापक श्री अशोक कुमार जयसवाल, प्रधान शिक्षिका
कुमारी शाहीन निशा एवं समस्त स्टाफ एवं बच्चों के माता पिता तथा अन्य ग्रामीण वासी उपस्थित रहे।