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Dharmendra Singh

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January 2026
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January 1, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

लोकेशन = श्योपुर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन एवं नारेबाजी करके मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री के नाम दिया ज्ञापन

लोकेशन = श्योपुर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन एवं नारेबाजी करके मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री के नाम दिया ज्ञापन

एंकर = श्योपुर कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत एवं अवैध तरीके से ट्रेंक्यूलाइज का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट श्योपुर पर प्रदर्शन एवं नारेबाजी करते हुए किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंडला के नेतृत्व में युवाओं एवं वन्य जीव पर्यावरण प्रेमीयों ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को संबोधित करते हुए डिप्टी कलेक्टर संजय जैन को ज्ञापन देकर कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत के कारणों की उच्चस्तरीय जांच एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है । कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगामी समय में आंदोलन के रुपरेखा का बनाई जाएगी। राधेश्याम मीणा ने बताया कि चीता परियोजना के तहत नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर में लाए गए चीतों की मौत की एक वजह क्या उन्हें 110 बार ट्रैंक्यूलाइज यानि बेहोश किया जाना भी है. कूनो में मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति लिए बगैर ही 110 बार चीतों को बेहोश किया गया. इससे कई चीतों की मौत पर प्रश्न खड़ा हो गया है. जब नामीबिया से ये चीते लाए जा रहे थे तब एक शर्त ये भी थी कि चीते वहीं के डॉक्टर की निगरानी में रहेंगे. फिर क्या वजह थी कि अफ्रीकन डॉक्टर एडविन टॉडरिफ इस्तीफे देकर चले गए । कूनो नेशनल पार्क से जुड़े दस्तावेज में ये स्पष्ट बताया गया है कि चीतों को 110 से अधिकर बार ट्रेंक्यूलाइज किया गया. यानि उन्हें बेहोश किया गया. ये किसकी अनुमति से हुआ और सबसे बड़ी बात कि इस तरह से बेहोश किये जाने ने क्या चीते की इम्यूनिटी पर असर नहीं डाला होगा. बेहोश किए जाने से सबसे पहले किडनी पर असर पड़ता है फिर बाकी इंटरनल पार्ट भी प्रभावित होते हैं. इस प्रोजेक्ट में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का भी उल्लंघन किया गया. चीतों को 110 बार से भी ज्यादा बार बेहोश किया गया और इसके लिए मुख्यवन जीव संरक्षक की मंजूरी नहीं ली गई जो कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11 की अनुसूची 1 का पूरी तरह से उल्लंघन है. दूसरा जो प्रोसेस की गई उसका कोई रिकार्ड भी नहीं रखा गया. कूनो नेशनल पार्क में पहले मीडिया को जानकारी दी जाती थी और बैठक सहित मीडिया के साथ प्रेसवार्ता भी होती थी, परंतु जब से चीतों की मौत हुई तब से मीडिया को प्रेस वार्ता सहित अन्य आयोजन में बुलाना बंद कर दिया है । पत्रकारों को चीता प्रोजेक्ट से जुड़े जानकारी साझा की जाए एवं पत्रकारों को कूनो नेशनल पार्क में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए ।

श्योपुर से =

गुलाब सिंह मारू की रिपोर्ट