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May 16, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

सिविल अस्पताल मे आदिवासी बालक को सुलभता के साथ मिली स्वास्थ्य सेवा : सिविल अस्पताल मे सर्जन डाॅ नितीन जोशी ने केलोइड से पीड़ित बालक का किया निशुल्क उपचार,निजी अस्पतालों मे हजारो होते खर्च

सरदारपुर से राहुल राठौड़
सरदारपुर – सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को लेकर खबरे तो वैसे हमेशा सुर्खियों मे रहती है। लेकिन इन सरकारी अस्पतालो मे ऐसे कई सेवाभावी चिकित्सक भी है जो मरीजो की गंभीर एवं जटिल बीमारियों का उपचार सरकारी अस्पताल मे निशुल्क कर देते हे। ऐसे उपचारों के लिये निजी चिकित्सालयों मे हजारो रु खर्च करने पड़ते है।
हम बात कर कर रहे है सिविल अस्पताल सरदारपुर की 120 साल से आदिवासी अंचलों के ग्रामीणजनो को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करवा रहा सिविल अस्पताल सरदारपुर वैसे तो लापरवाही को लेकर सुर्खियों मे रहा है लेकिन यहां पर पदस्थ कई चिकित्सकों ने ऐसी जटिल गंभीर बीमार मरीजों का उपचार किया है जिस पर निजी चिकित्सालयों मे हजारो रू खर्च करना पडता है।
करीब दो दशक से भी अधिक समय से सिविल अस्पताल मे पदस्थ सर्जन डाॅ. नितीन जोशी ने झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के एक आदिवासी बालक का केलोइड का उपचार निःशुल्क किया। जबकि यह उपचार निजी चिकित्सालय में कराने पर 15 से 20 हजार रू का खर्च होता है ।
झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के 14 वर्ष के बालक किशन पिता रूमाल भाभर को उसके परिजन उपचार के लिये सिविल अस्पताल सरदारपुर मे लेकर आये । बालक को दोनो कान पर केलाइड (कान के पीछे भाग पर गांठ) था । जिसका उपचार वै दो तीन बार निजी चिकित्सालय मे करा चुके थे। लेकिन फिर से केलाइड उभर जाता था। जिस पर सर्जन डाॅ नितीन जोशी ने बालक की पुरी काउंसलिंग कर एक कान की सिविल अस्पताल मे अलग-अलग प्रकार की दवाईयो और इंजेक्शन से छोटी सी सर्जरी कर केलाइड को काॅन से अलग कर वहा पर टांके लगा दिये तथा दो माह बाद परिजनों को बालक को लेकर आने को कहा । परिजन बालक को तीन माह बाद लेकर अस्पताल आये । डाॅ नितीन जोशी ने बताया की तीन माह बाद बालक के कान के पीछे केलाइड नही था तभी हमने उसके दुसरे कान से भी उसी प्रकार केलाइड को अलग किया। डाॅ. जोशी ने बताया की बालक का पुरा उपचार सिविल अस्पताल मे निशुल्क हुआ यदि यह उपचार निजी चिकित्सालय मे होता तो 20 से 30 हजार का खर्च आता।
डाॅ नितीन जोशी ने बताया की ऐसे कई जटिल केस आते है सीमित संसाधनों के बाद भी हमारा पुरा प्रयास रहता है की मरीज को बेहतर उपचार यही पर हो जाये। अभी सिविल अस्पताल मे माइनर ओटी ही है। लेकिन नये भवन मे मेजर ओटी मे सारी सुविधाएं होगी जिसके बाद अपेंडिक्स सहित कई सर्जरी मरीज की यही पर हो जायेगी।