Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

गढ़चिरौली का आदिवासी जनजीवन मुख्य रूप से वनों और प्रकृति से जुड़ा है, जहाँ गोंड, माड़िया और कोलम जैसे प्रमुख समुदाय रहते हैं।

महेश पांडुरंग शेडे की रिपोर्ट

गढ़चिरौली का आदिवासी जनजीवन मुख्य रूप से वनों और प्रकृति से जुड़ा है, जहाँ गोंड, माड़िया और कोलम जैसे प्रमुख समुदाय रहते हैं। ये समुदाय गोंडी और माड़िया भाषा बोलते हैं और प्रकृति पूजक होते हैं, जिनके मुख्य देवता पर्सा पेन हैं। उनका जीवन और संस्कृति वनों पर बहुत निर्भर करती है, लेकिन आधुनिक खनन परियोजनाओं के कारण उनके जीवन और पर्यावरण पर संकट आ गया है, जिससे उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रमुख जनजातियाँ और भाषाएँ

समुदाय: गोंड, माड़िया, परधान और कोलम प्रमुख आदिवासी समुदाय हैं।

भाषाएँ: इनकी मातृभाषाएँ मुख्य रूप से गोंडी और माड़िया हैं।

संस्कृति और जीवन शैली

प्रकृति से जुड़ाव: आदिवासियों का जीवन वनों से गहराई से जुड़ा है; वे प्रकृति को अपनी माँ और जीवन रेखा मानते हैं।

धार्मिक मान्यताएँ: ये प्रकृति-पूजक हैं और वनों, नदियों, पहाड़ों और सूर्य की आराधना करते हैं।

त्योहार: गणपति, दशहरा, होली और शंकरपट जैसे त्योहारों के अवसर पर मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

आजीविका: आदिवासियों का जीवन और आजीविका वनों और उससे मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर है।

वर्तमान चुनौतियाँ

पर्यावरणीय संकट: गढ़चिरौली का जंगल आदिवासियों की जीवनरेखा है, लेकिन लॉगिंग और खनन परियोजनाओं के कारण वनों और पर्यावरण पर संकट है।

खनन परियोजनाएँ: लौह अयस्क और क्वार्टजाइट जैसे खनिजों के लिए प्रस्तावित खनन परियोजनाएँ जंगलों को नष्ट कर रही हैं और आदिवासियों के जीवन और आजीविका को प्रभावित कर रही हैं।

सामाजिक विरोध: इन परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय आदिवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर उम्मीद लगाये हैं ।गढ़चिरौली का आदिवासी जनजीवन मुख्य रूप से वनों और प्रकृति से जुड़ा है, जहाँ गोंड, माड़िया और कोलम जैसे प्रमुख समुदाय रहते हैं। ये समुदाय गोंडी और माड़िया भाषा बोलते हैं और प्रकृति पूजक होते हैं, जिनके मुख्य देवता पर्सा पेन हैं। उनका जीवन और संस्कृति वनों पर बहुत निर्भर करती है, लेकिन आधुनिक खनन परियोजनाओं के कारण उनके जीवन और पर्यावरण पर संकट आ गया है, जिससे उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख जनजातियाँ और भाषाएँ
समुदाय: गोंड, माड़िया, परधान और कोलम प्रमुख आदिवासी समुदाय हैं।
भाषाएँ: इनकी मातृभाषाएँ मुख्य रूप से गोंडी और माड़िया हैं।
संस्कृति और जीवन शैली
प्रकृति से जुड़ाव: आदिवासियों का जीवन वनों से गहराई से जुड़ा है; वे प्रकृति को अपनी माँ और जीवन रेखा मानते हैं।
धार्मिक मान्यताएँ: ये प्रकृति-पूजक हैं और वनों, नदियों, पहाड़ों और सूर्य की आराधना करते हैं।
त्योहार: गणपति, दशहरा, होली और शंकरपट जैसे त्योहारों के अवसर पर मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
आजीविका: आदिवासियों का जीवन और आजीविका वनों और उससे मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर है।
वर्तमान चुनौतियाँ
पर्यावरणीय संकट: गढ़चिरौली का जंगल आदिवासियों की जीवनरेखा है, लेकिन लॉगिंग और खनन परियोजनाओं के कारण वनों और पर्यावरण पर संकट है।
खनन परियोजनाएँ: लौह अयस्क और क्वार्टजाइट जैसे खनिजों के लिए प्रस्तावित खनन परियोजनाएँ जंगलों को नष्ट कर रही हैं और आदिवासियों के जीवन और आजीविका को प्रभावित कर रही हैं।
सामाजिक विरोध: इन परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय आदिवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर उम्मीद लगाये हैं ।