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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

पंचमहाभूतों, बुद्धि, अहंकार, मूल प्रकृति और दस इन्द्रियां और पांच विषय एक मन और इनके इच्छा द्वेष आदि विकार का समुच्चय ही क्षेत्र है और आत्मा क्षेत्रज्ञ है।

सादरप्रकाशनार्थ

गुना

27/10/25

पंचमहाभूतों, बुद्धि, अहंकार, मूल प्रकृति और दस इन्द्रियां और  पांच विषय एक मन और इनके इच्छा द्वेष आदि विकार का समुच्चय ही क्षेत्र है   और   आत्मा क्षेत्रज्ञ है। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को जानकर सम्यक् आचरण करना   अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इस प्रकार गीता का प्रधान विषय आत्मविस्मृत बद्धजीव है। गुरू नही तो जीवन शुरू नहीं बिना गुरू के यह तत्वज्ञान संभव नहीं है भगवान ने क्षेत्रज्ञ के लक्षण बताते हुए आचार्योपासना शब्द से

श्रद्धा भक्ति सहित योग्य गुरु की सेवा , श्रेष्ठता के अभिमान तथा दम्भाचरण का अभाव , किसी भी प्राणी को किसी भी प्रकार से ना सताना, क्षमा भाव मनवाणी की सरलता , बाहर भीतर की शुद्धि अंत:करण की स्थिरता और मन इंद्रियों सहित शरीर का निग्रह आदि अनेक लक्षणों से युक्त ज्ञान को समझाते हुए बताया कि क्षेत्र और क्षेत्रज्ञा को जानना ही ज्ञान है।

उक्त आशय के विचार विश्वगीताप्रतिष्ठानम् मध्य भारत भारत प्रांत के संरक्षक पं ओमप्रकाश पाराशर ने विगत रविवार को आयोजित गीता स्वाध्याय में श्रीमदभगवत

गीता के क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग नामक 13वें अध्याय के आरंभिक एकादश श्लौकों के संदर्भ में व्यक्त किये। ज्ञान भक्ति और कर्म योग से ओतप्रोत यह आयोजन विकास नगर स्थित सिद्धेश्वरी माता मंदिर संपन्न हुआ। अमृत वचन प्रस्तुत करते हुए श्री राधे श्याम शर्मा ने कबीर दास जी के उदाहरण से भक्त की मनोदशा स्पष्ट की । सुबह से सुना कर श्री राम शंकर दुबे ने कहा कि जिसमें विद्या ज्ञान नही है होना जिसने तप भी नहीं किया है वह इस पृथ्वी पर भार की तरह है वह पृथ्वी पर पशुओं के सामान्य घूमता रहता है। प्रेरक प्रसंग के माध्यम से मंदिर के पुजारी पं जितेंद्र शर्मा ने अपने बाल्यकाल की घटना सुनाते हुए बताया कि विश्वगीताप्रतिष्ठानम् के द्वारा सहयोग भवन

में सायंकालीन गीता-संस्कृत कक्षा से प्राप्त शिक्षा और संस्कार आज भी जीवन में काम आरहे है।उल्लेखनीय है कि सहयोग भवन आरंभ में चिकित्सालय था जिसमें जीवन मुक्ताचार्य पं रमेश कुमार पाण्डेय संस्थापक विश्वगीताप्रतिष्ठानम् के अथक प्रयासों से अमृतवाणी संस्कृत भाषा प्रशिक्षण संस्थानम् संचालित हुआ था। श्रीमद् भगवत गीता की गरिमामय अगवानी करते हुए उमाशंकर भार्गव ने आगामी रविवार को गीता स्वाध्याय गीता क्षेत्र मानसपुरम् अंतर्गत शास्त्री पार्क शिव मंदिर पर आयोजित होने जाए रहे गीतास्वाध्याय हेतु सभी से सहभागिता का अनुरोध किया। गीतास्वाध्याय के यजमान श्री रामबाबू भार्गव ने सभी का आभार माना।

प्रेषक

मनोज शर्मा

प्रचार प्रमुख

गीतासंस्कृत स्वाध्याय मंडल गुना

9039871197