लालच में धोखाधड़ी: जमीन विक्रेता ने इकरारनामा तोड़ा, खरीदार को दी जान से मारने की धमकी
फेंसिंग, बाउंड्रीवाल तोड़कर लाखों का नुकसान, मामला न्यायालय पहुंचा
कटनी।
जिले में जमीन क्रय-विक्रय के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम लिगरी, लखनवारा का है, जहां एक कथित लालची जमीन विक्रेता ने इकरारनामा करने के बाद न केवल सौदे से मुकरने की कोशिश की, बल्कि खरीदार को धमकियां देकर उसकी बनाई गई संरचनाओं को
तोड़कर लाखों का नुकसान पहुंचाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुभम साहू पिता पुन्नू साहू, निवासी हीरापुर कौड़िया, ने अपनी जमीन का सौदा फरियादी से किया था। दोनों पक्षों के बीच विधिवत इकरारनामा हुआ, एडवांस राशि ली गई और रजिस्ट्री की तिथि भी तय की गई थी।
भरोसे का फायदा उठाकर किया गया खर्च
इकरारनामे की शर्तों पर भरोसा करते हुए फरियादी ने जमीन पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च कर फेंसिंग, लेवलिंग, गार्डन, बाउंड्रीवाल और एक कमरा बनवाया। जमीन के साफ-सुथरा और विकसित होते ही विक्रेता की नीयत बदल गई।
गालियां, धमकी और तोड़फोड़ का आरोप
फरियादी का आरोप है कि तय तिथि पर जब विक्रय पत्र निष्पादित करने की बात आई तो शुभम साहू ने उसे अपने गांव बुलाकर भद्दी गालियां दीं, रजिस्ट्री से साफ इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद शुभम साहू ने अपने साथियों प्रदीप साहू और सुनील प्यासी के साथ मिलकर जमीन पर बनी बाउंड्रीवाल, गार्डन और कमरे में तोड़फोड़ कर दी, जिससे करीब 5 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
पुलिस पर उदासीनता का आरोप
फरियादी ने स्लीमनाबाद थाना में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने केवल आवेदन लेकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे निराश होकर फरियादी ने न्यायालय की शरण ली है।
न्यायालय में पहुंचा मामला
फरियादी ने जिला न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी, धमकी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
इन जमीनों का हुआ था सौदा
फरियादी के अनुसार विवादित भूमि ग्राम लिगरी, पटवारी हल्का लखनवारा की है, जिसमें खसरा नंबर
41/1/1/1/1 रकबा 0.23 हेक्टेयर
41/2 रकबा 0.54 हेक्टेयर
42/5 रकबा 0.10 हेक्टेयर
42/4 रकबा 0.12 हेक्टेयर
शामिल हैं।
जनता से अपील
फरियादी ने आम नागरिकों से अपील की है कि न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक उक्त भूमि की कोई भी खरीद-फरोख्त न करें, ताकि कोई अन्य व्यक्ति इस विवाद में न फंसे

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