रेलवे जंक्शन के बाहर नामचीन होटल, अंदर की रसोई और यात्रियों की थाली पर बड़े सवाल
होटल से सीधे रेल यात्रियों की सीट तक पहुंच रहा भोजन, खाद्य सुरक्षा से लेकर रेलवे-IRCTC के नियमों के पालन की जांच जरूरी
कटनी। कटनी रेलवे जंक्शन के बाहर चंद कदमों की दूरी पर संचालित एक नामचीन होटल की रसोई से तैयार भोजन सीधे रेल यात्रियों की सीट तक पहुंचने के मामले ने खाद्य सुरक्षा और रेलवे नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बाहर से शानदार नजर आने वाले होटल के रेस्टोरेंट में तैयार होने वाला भोजन ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से यात्रियों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यात्रियों की थाली तक पहुंचने से पहले इस भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित तैयारी की जांच आखिर कौन कर रहा है?
रेल यात्रियों के लिए होटल या रेस्टोरेंट से भोजन मंगाना आज सामान्य बात हो गई है। ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से यात्री ट्रेन में अपनी सीट पर भोजन मंगा लेते हैं। लेकिन जब भोजन सीधे यात्रियों की सीट तक पहुंच रहा हो, तब उसकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
चमकदार होटल के पीछे रसोई की वास्तविक स्थिति क्या?
होटल और रेस्टोरेंट का बाहरी स्वरूप आकर्षक होना अलग बात है, लेकिन भोजन की वास्तविक गुणवत्ता का निर्धारण उसकी रसोई की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के रखरखाव, खाना पकाने की प्रक्रिया और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता से होता है।
सवाल यह है कि जिस रसोई में रेल यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है, वहां खाद्य पदार्थ किस तरह रखे जाते हैं? कच्चे और पके भोजन को अलग रखा जाता है या नहीं? रसोई में साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था है या नहीं? कर्मचारियों द्वारा हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है या नहीं? भोजन तैयार करते समय हेयरनेट/कैप, साफ एप्रन और आवश्यक स्वच्छता उपाय अपनाए जाते हैं या नहीं?
इन बिंदुओं की वास्तविक स्थिति की जांच संबंधित विभाग द्वारा किया जाना जरूरी है।
ऑनलाइन ऑर्डर से सीट तक पहुंच रहा खाना, जवाबदेही किसकी?
रेस्तरेंट से भोजन तैयार होने के बाद डिलीवरी बॉय उसे लेकर रेलवे स्टेशन परिसर में प्रवेश करता है और यात्रियों की सीट तक पहुंचाता है। ऐसे में केवल भोजन की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में भोजन पहुंचाने की अनुमति, संबंधित सेवा की वैधता और रेलवे/IRCTC के लागू नियमों का पालन भी जांच का विषय बनता है।
क्या संबंधित होटल अथवा रेस्टोरेंट रेलवे यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक अनुमति और प्राधिकरण रखता है? क्या उसकी ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवा रेलवे के निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है? क्या डिलीवरी करने वाले व्यक्तियों को स्टेशन परिसर और यात्रियों की सीट तक भोजन पहुंचाने की विधिवत अनुमति है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब यात्रियों के साथ-साथ रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों को भी देना चाहिए।
बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का है।
अब देखना यह है कि संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी, रेलवे प्रशासन और अन्य जिम्मेदार विभाग रेलवे जंक्शन के आसपास संचालित ऐसे रेस्टोरेंट की वास्तविक जांच करते हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रहती है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि प्रतिष्ठान सभी निर्धारित मानकों का पालन करता पाया जाता है तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
रेल यात्रियों की थाली तक पहुंचने वाला भोजन सिर्फ स्वादिष्ट होना पर्याप्त नहीं—उसका सुरक्षित, स्वच्छ और नियमों के अनुरूप होना भी उतना ही जरूरी है।

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