Chief Editor

Dharmendra Singh

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February 2026
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February 15, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

उठो देव,बैठो देव,पांवरिया चटकाओ देव, देवउठनी व प्रबोधिनी एकादशी पर घर-घर हुई पूजा, बाजार में जमकर हुई गन्नों की विक्री।


उठो देव,बैठो देव,पांवरिया चटकाओ देव।
देवउठनी व प्रबोधिनी एकादशी पर घर-घर हुई पूजा, बाजार में जमकर हुई गन्नों की विक्री।

डबरा —- उठो देव, बैठो देव, पांवरिया चटकाओ देव की प्रार्थना रविवार की देर शाम घर-घर सुनाई दी। नगर और अंचल में भगवान विष्णु के उपासको ने घर-घर गन्ने का मंडप सजाया जिसमें भगवान शालिगराम और माता तुलसी के विवाह उत्सव की परंपरा का निर्वहन किया गया। उल्लेखनीय है। कि देवशयनी एकादशी के बाद से विवाह आदि कार्यक्रमों का दौर थम जाता है। लेकिन देव जागते ही एक बार फिर से शादी विवाह का दौर शुरू होता है। दीपावली के बाद कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। जैसे ही रविवार को देवउठनी एकादशी के अवसर पर जैसे लोगों ने पूजा अर्चना की वैसे ही कई वैवाहिक मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो गए। वहीं देवउठनी एकादशी के अवसर पर मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की गई साथ ही घरों में गन्ने का मंडप तैयार किया गया । और विशेष प्रकार के पकवान बनाए गए। पूजा अर्चना करने के लिए कई लोगों ने सुबह से स्नान के बाद एकादशी का व्रत रखा और देर शाम को गन्ना का मंडप बनाकर सभी परिवार जनों के साथ मंडप के पास एकत्रित होकर देवों को जगाने के लिए पूजा की गई। इस दौरान भगवान को स्नान कराया गया। उसके बाद उन्हें नए वस्त्र आदि पहनाए गए। और घर में बनाए गए विशेष पकवानों का भोग लगाया गया। उसके बाद सभी के द्वारा मंडप की परिक्रमा देते हुए प्रार्थना की गई की उठो देव, बैठो देव,पांवरिया चटकाओ देव, कुंवारे के ब्याह करो, ब्याह के गोने करो, गोनों के रोने करो का गीत भी गाया गया। इस दौरान बच्चों ने जमकर आतिशबाजी का भी लुत्फ उठाया और सामूहिक रूप से भगवान की आरती उतारी गई। वहीं देवउठनी एकादशी के अवसर पर गन्नों की पूजा का विशेष महत्व होने के कारण बाजार में जगह-जगह गन्ने की दुकानें सजी जहां से लोगों ने 50 से 75 रुपये में पांच गन्ने खरीदे। गन्ने की जमकर विक्री हुई। वही पूजा सामग्री के लिए लोगों ने शकरकंद, सिंघाड़ा, बेर, चना की भाजी, मटर ,नया आलू, टमाटर, गोभी, मेथी ,पालक, गाजर, सेम और अमरूद आदि नई फसल की नई सब्जियों को भगवान के स्वागत में पूजा के साथ रखा गया साथ ही सभी इसी प्रकार की सब्जियों को मिलाकर रामभाजा बनाया गया जिसका भी भोग भगवान को अर्पित किया गया।