
नरोत्तम मिश्रा डबरा के हीरा लेकिन हम दतिया वालो ने इन्हें चुरा लिया है,संतोष उपाध्याय उपाध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन दतिया।

डबरा:- हमने आपके कलेजे के टुकड़े को नगीना को हीरा को चुरा लिया है, मित्रों दतिया वाले इसमें माहिर रहे है, दतिया के एक एक घर मे आज नरोत्तम मिश्रा की गूंज गूँजती है, हम लोग नरोत्तम मिश्रा के दर्शन को तरसते है, घर घर मे महिला हो बच्चा हो पुरुष हो बुजुर्ग हो सभी की यही अभिलाषा रहती है, और माँ पीताम्बर माई से 24 घंटे प्रार्थना रहती है, की जिस जन नेता ने दतिया की दशा और दिशा ही बदल दी है, में उन्हें धन्यवाद देने आया हु, एक समय लोग दतिया को प्रदेश के नक्शे में तलासते थे दतिया की कोई पहचान नही थी और हम ग्वालियर व झाँसी के बीच मे बसे दतिया को एक टापू के रूप में बताते थे, लेकिन जब से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में कदम रखे है, तब से प्रदेश में कही पर भी चले जाओ अब सिर्फ इतना कहने की जरूरत होती है कि हम दतिया से आए है, डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया के एक एक मतदाता का आत्मबल मजबूत किया है, और उनका स्वाभिमान जिंदा रखने में पूरी ताकत झोंक दी है, यह शब्द दतिया से गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के ग्रह निवास पर मिलने डबरा पहुँचे दतिया प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संतोष उपाध्याय ने गृहमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कही है।

वहीं पर उपाध्याय ने गृहमंत्री की तारीफ में कसीदे कसते हुए यह भी कहा है, कि प्रदेश के एक मात्र मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ही हैं, जिनकी तारीफ महामहिम राज्यपाल तक करते हैं, जो किसी भी नेता के लिए एक बहुत बड़ी बात होती है, उपाध्याय ने कहा कि बाढ़ आपदा के समय आप सभी ने परिदृश्य देखा होगा पूरे भारत वर्ष में कभी किसी नेता ने अपने प्राण न्यौछावर करके इतनी आत्मीयता अपनी जनता के लिए नही दिखाई होगी जितनी आप सभी के लाडले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दिखाई थी, तब एक एक नेता को एक एक राजनीतिक संगठन को यह स्वीकार करना पड़ा था कि जन नेता कोई है तो वह नरोत्तम मिश्रा ही है, जिनकी तारीफ प्रदेश के महामहिम राज्यपाल तक ने की है, धन्य है यह डबरा की यह माटी डबरा का यह जल जिसने नरोत्तम मिश्रा को सींचा इनको इस लायक बनाया लेकिन डबरा के लोगों इनका लाभ नही ले पाए इनका लाभ हम दतिया के लोग ले रहे है, 2008 से पहले जब दतिया में नल आते थे तब घर के चार लोग पानी भरने के लिए लगते थे, 6 फिट के गड्ढे में एक आदमी कूद कर नल से पानी भर कर देता था, दुशरा उसको ऊपर लेता था, पूरी पूरी रात लोगों की पानी भरने में निकल जाती थी, लेकिन तब से नरोत्तम मिश्रा के पैर दतिया में पड़े है, तब से दतिया विकास की रोज रोज नई नई इबारत लिख रहा है।

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