बुद्ध नाथ चोहान रिपोर्टर
उमरेठ थाना अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में कच्ची शराब पीने वाले शौकीनों को आसानी से मिल जाती है सो रूपए की एक बोतल कच्ची शराब किंतु कुछ लोग खुलेआम शराब का धंधा फलता फूलता नजर आ रहा है सूत्र बताते हैं कि कच्ची शराब बनाने के लिए लोग महुआ के साथ कई जड़ी बूटियों का भी सेवन करते हैं वहीं कुछ लोग शराब बनाने में तो महुआ के साथ गुड़ का सेवन करते हैं और कुछ जानकारों का मानना है ग्रामीण अंचलों में अधिकांश लोग अपने खेतों में काम करते हैं जब अपने खेतों से हारे थके घर पहुंचते हैं तो अपनी थकावट मिटाने के लिए कुछ लोग साम के समय कच्ची शराब पीकर अपनी थकावट मिटाते हैं वही क्षेत्र में निरंतर पुलिस कच्ची शराब बनाने वाले एवं बेचने वाले पर कार्यवाही भी करती हैं किंतु छुपते छुपाते कुछ लोग बड़े पैमाने पर ग्रामीण अंचलों में शराब बनाकर सप्लाई भी करते हैं वहीं कई लोग बड़े शौक से कच्ची शराब को पीना पसंद करते हैं वहीं कुछ लोगों का कहना है इस समय कच्ची शराब बेचने वाले नाप ठीक से नहीं रखते और महंगी शराब बेची जा रही है तो कहीं मिलावट वाली शराब बेची जाती है ज्यादातर कुछ गांव में कच्ची शराब सो रुपए बोतल मिलती फिर भी लोग एक से दो किलोमीटर दूर तक जाकर शराब पीते हैं जबकि पुलिस द्वारा कई स्थानों पर निरंतर दबिश देते हुए कई जगह आबकारी एक्ट की कार्यवाही भी की जाती है कुछ लोगों का कहना है आदिवासियों को कुछ बोतल कच्ची महुआ की शराब बनाने एवं पीने की छूट है तो कुछ लोग कहते हैं हम तो शौक से पीने के लिए बनाते हैं और कोई बात विवाद भी नहीं करते इस समय ग्रामीण इलाकों में अधिकांश महुआ की फसल भी आ गई है फिर भी महुआ की कीमत लगभग 60 से 70 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है शराब बनाने के लिए लोग ना ना प्रकार की विधि से शराब बनाई जाती है वहीं कुछ पीने वाले लोग सरलता से महुआ की कच्ची शराब बनाकर स्वयं पीते हैं और वहां की लागत निकल जाए दूसरी बार बनाने के लिए इसलिए बेचते भी हैं


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