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March 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

विजय चौहान रिपोर्टर

परीक्षा फार्म भरने के समय नहीं बताया, विभिन्न मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट के पद वंचित रह जाएें
ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल का बांड भी पूरा नहीं कर पाएंगे
इंदौर। राष्ट्रीय आयुर्वेदिक आयोग नई दिल्ली के परिपालन में केवल बीसीबीआर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों का ही रिजल्ट घोषित करने के इस फरमान से प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थी के सामने भविष्य को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इससे मेडिकल के छात्र अपनी सीनियर रेसीडेंट भी नहीं रह पाएंगे। अगर यह एग्जाम जरूरी थी तो जब फॉर्म भरे जा रहे थे तभी इसका पास होने का सर्टिफिकेट क्यों नहीं मांगा गया।
जानकारी के मुताबिक मेडिकल पीजी डिग्री डिप्लोमा के लिए 18 मई अंतिम तारिख को फॉर्म भरे गए थे, जिसमें तब यह नहीं बताया गया था कि राष्ट्रीय आयुर्वेदिक आयोग नई दिल्ली के अनुसार बीसीबीआर (बैसिक कोर्स इन बायोमेडिकल रिसर्च) कोर्स करने वाले विद्यार्थी ही परीक्षा के फॉर्म भरेंगे । अगर ऐसा होता तो प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थी के सामने यह संकट नहीं आता । अचानक मध्य प्रदेश आयुर्वेदिक आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ने यह फरमान जारी कर दिया कि केवल बीसीबीआर कोर्स उत्तीण करने वाले विद्यार्थियों के ही परिणाम घोषित किए जाएंगे । इस कारण मध्य प्रदेश के मेडिकल छात्रों ने एमएस-एमडी की परीक्षा दी थी जो 28 मई से 7 जून तक हुई थी। एक महा के बाद भी रिजल्ट घोषित नहीं किया गया है। जिसके कारण विभिन्न मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट के पद पर बैठने से वंचित रह जाएंगे। उल्लखित यह है कि इंडेक्स मेडिकल कॉलेज इंदौर , पीपुल्स मेडिकल कॉलेज भोपाल इन की खुद की युनिवर्सिट होने के कारण इन का रिजल्ट घोषित हो चुका है। जिसके कारण उत्तीण छात्र-छात्राएं सीनियर रेसीडेंट के पद पर बैठ कर लाभांवित हो जाएगे और साथी ही सरकारी मेडिकल कॉलेज का विद्यार्थी एक साल का बांड करने से वंचित हो जाएंगे।
इस तरह यह छात्र अपने कैरियर से छह महा पीछे हो जाएंगे । मध्य प्रदेश में मेडिकल के छात्रों ने एग्जाम दी थी जिसमें प्रदेशभर से ढाई हजार विद्यार्थी बैठे थे । लगभग 500 मेडिकल छात्रों ने बीसीबीआर एग्जाम नहीं दी जिसके कारण उनके सामने यह संकट खड़ा हो गया है । कुछ छात्रों का कहना है कि अगर शपथ पत्र के माध्यम से उनका रिजल्ट घोषित किया जाता है तो वह अगले महीनों होने वाली बीसीबीआर की एग्जाम दे देंगे इससे उनकी सीनियर रेसीडेंट भी बच जाएगी। मेडिकल छात्रों में इसको लेकर काफी आक्रोश है और वह सरकार का ध्यान आकर्षित करवाने का प्रयास कर रहे है।