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Dharmendra Singh

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February 16, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

नगर में आयोजित किया जा रहा है श्रीराम चरित मानस सम्मेलन।
विधायक रामपाल सिंह राजपूत ने की कथा श्रवण।

स्थान मध्य प्रदेश लोकेशन सिलवानी

नरेन्द्र राय ब्यूरो चीफ

एंकर रायसेन जिले की तहसील सिलवानी नगर में :-राष्ट्र भक्ति ही राम भक्ति है। राम और राष्ट्र एक दूसरे के पूरक है। संपूर्ण भारत वर्ष का परिचय श्रीराम के बगैर अधूरा है। यह उद्गार वेदाचार्य पंडित रामकृपालू उपाध्याय ने व्यक्त किए। वह नगर के मंगल भवन रघुवंशी गार्डन में आयोजित श्रीराम चरित मानस सम्मेलन के तृतीय दिवस उपस्थित श्रद्वालुओं को सबोधित कर रहे थे। संतो की वाणी का रसा स्वदन करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुंच रहे है। उन्होंने कहा कि जब श्री हनुमान जी महाराज श्री सीता जी की खोज करने के लिए समुद्र तट पर विराजमान हैं और श्री जामवंत जी के द्वारा प्राप्त प्रेरणाओं के माध्यम से उन्होंने विराट स्वरूप धारण किया है एवं श्री जामवंत से मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं कि आप मुझे मार्गदर्शन कीजिए कि मेरा जो अवतरण है राम काज के लिए ही हुआ है । राम काज तव लगि अवतारा।और दूसरे अवसर पर उनके कथन है राम काज किन्हें बिन मोहिं कहां विश्राम। हनुमान महाराज ने अपना जीवन राम काज के लिए संपूर्ण रूप से समर्पित किया है।मानस सम्मेलन को निर्मल कुमार शुक्ला (मानस महारथी) महाराष्ट्र, ब्रह्मचारी जी परीक्षा पीठाधीश्र ,श्री राघव रामायणी (झांसी) नगर खेरापति नरेश शास्त्री ने भी संबोधित किया। उन्होने बताया कि हनुमान जी राम काज के लिए सदैव तत्पर रहते हैं हनुमान से प्रेरणा हमें लेना चाहिए किए जब संपूर्ण राष्ट्र ही राममय है और संपूर्ण राष्ट्र में राम समाए हुए हैं तो राष्ट्र कार्य के लिए हमें सदैव समर्पित रहना चाहिए। राष्ट्र रक्षा से बढ़कर कोई संकल्प नहीं हो सकता । जो व्यक्ति राष्ट्र सेवा राष्ट्र रक्षा में संलग्न हैं वह भी परोक्ष रूप से राम काज में संलग्न हैं। इस बात का हमें विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।उन्होने कहा कि संपूर्ण जीव चराचर में संपूर्ण जगत में वही परमात्मा शक्ति समाहित है उसी शक्ति को सर्व रूप से प्रत्यक्ष मानकर सेवा सुरक्षा में स्वयं को संलग्न करना ही राष्ट्रभक्ति है। जोकि राम भक्ति का पर्याय है रामकृपालु उपाध्याय जी ने राम कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राम कथा का श्रवण करते करते व्यक्ति कभी तृप्त नहीं होता है । उसके जीवन में इससे कभी तृप्ता का भाव जागृत नहीं होता है ।इसलिए रामकथा का आयोजन बार.बार होता है यह रामकथा रूपी दृढ़ नाव हमें भवसागर से पार ले जाती है।
सिलवानी विधायक ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत ने कथा श्रवण कर सभी संतो महात्माओं को प्रमाण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।