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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

ग्रामीण परिवेश में पला-बड़ा हूँ, मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में निवासरत मेरे आदिवासी भाई-बहनों का रेल में बैठने का सपना कब पूरा होगा।

मुकेश अम्बे रिपोर्टर

Slug **मैं ग्रामीण परिवेश में पला-बड़ा हूँ, मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में निवासरत मेरे आदिवासी भाई-बहनों का रेल में बैठने का सपना कब पूरा होगा ***डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी, सांसद राज्यसभा मध्यप्रदेश।

बड़वानी:- राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने बुधवार संसद के शीत कालीन सत्र में निमाड़ क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मनमाड़-इंदौर रेल मार्ग परियोजना को अविलंब शुरू करने हेतु सदन में किया सवाल।

सदन में सभापति के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि वे मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से आते हैं । यह सम्पूर्ण क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य जिलों से घिरा है। जहां आज तक किसी ने रेल नही देखी । यहाँ के मेरे आदिवासी लोग रेल को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, क्योंकि आज तक कि पूर्ववर्ती सरकारों ने यहाँ के लोगो को रेल मार्ग परियोजना को शुरू करने के नाम पर छला ही है,मैं इस सदन के माध्यम से यह बताना चाहता हूँ कि मनमाड़-इंदौर रेल मार्ग की परियोजना लगभग 105 सालों से प्रस्तावित है। परंतु प्रस्तावित समय में भी यह रेल मार्ग आज तक पूरा नही हो पाया है।
सांसद डॉ. सोलंकी ने बताया कि उक्त रेल मार्ग का सर्वे, 2017 में पूर्ण कर अंतिम सर्वे रिपोर्ट सहित डी.पी.आर. तैयार हो चुकी है। इस प्रस्तावित परियोजना को लेकर वित्तीय प्रबंध शत-प्रतिशत राशि अन्य मदो से जिसमे जवाहर पोर्ट (जे.एन.पी.टी.) द्वारा 55% राशि जहाजरानी मंत्रालय द्वारा 15% राशि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 15 % राशि तथा महाराष्ट्र सरकार द्वारा 15% राशि मंजूर की जा चुकी है।
इस तरह इस परियोजना को लेकर रेलवे को अपनी 01% प्रतिशत राशि भी खर्च नही करनी है। इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र राज्य शासन द्वारा एम.ओ.यू. भी पारित हो चुका है। इसका कार्य डी.पी.आर. s.v.p.s. कम्पनी स्पेशल व्हीकल के द्वारा पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है।
इस तरह इस परियोजना को पूरा करने हेतु कार्यवाही चल रही है,इसी बीच पश्चिम रेलवे द्वारा मात्र चार पुलियाओं का टेंडर निकाला जा चुका है। उक्त परियोजना को पूरा करने हेतु पश्चिम रेलवे द्वारा 492.76 करोड़ की राशि 30 जनवरी 2018 को स्वीकृत कर टेंडर निकाला गया था जबकि पूरी परियोजना का टेंडर निकाला जाना चाहिए था। जबकि पूर्ण राशि अन्य मदो से पहले ही स्वीकृत हो चुकी है। एक ही परियोजना के लिए दो अलग-अलग मदो से राशि स्वीकृत करने के बावजूद भी इस परियोजना का पूर्ण कार्य प्रारंभ क्यों नही हो सका है?
मैं एक ग्रामीण परिवेश में पला-बड़ा हूँ मेरे आदिवासी भाई-बहनों के लिये रेल में बैठने का एक सपना सपना ही बना हुआ है।