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April 7, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

ब्रजेश पाटिल रिपोर्टर

हरदा सिराली जल संसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की शिकायतें सर्वाधिक है, और निराकरण शुन्य है कारण पीएचई विभाग के अधिकारियो के पैर अंगद की तरह कई वर्षों से जमे हुए हैं, वहीं सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों की ठेकेदारों एवं पार्थ (कंस्ट्रक्शन कंपनी) निर्माण कार्य एजेंसी से साठ गांठ के चलते सुनवाई नहीं होती है, जबकि घर बैठे शिकायत का निवारण करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन (181) सेवा अब हेल्पलेस साबित होती नजर आ रही है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते लोगों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि आवेदक एक ही समस्या को लेकर बार-बार 181 डायल कर रहे हैं, जबकि उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। अब ग्राम नहाली कंला में विगत 9 माह यानी अप्रैल माह से सीएम हेल्पलाइन पर पीएचई विभाग की एक शिकायत दर्ज है जिसका निराकरण अभी तक नहीं हुआ, हालांकि इस बीच कई बार शिकायतें बंद करने के लिए दबाव बनाया गया लेकिन बंद नहीं करवाई, लेकिन ग्राम में और भी अन्य लोगों की शिकायतें चल रही थी जिन्हें संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन देकर बंद करवा दी है,

शिकायत में क्या है दर्ज़

ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन पर पीएचई विभाग के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई है जिसमें ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्राम में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया गया, जिसमें ठेकेदार एवं पीएचई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही देखी गईं, टेस्टिंग के दौरान नल जल योजना से घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया, और जिसमें जगह जगह पाईप लाईन टूटी-फूटी हुई दिखाई दी जिससे जगह जगह पानी लिंकेज होने लगा, उसके बाद दोबारा टेस्टिंग नहीं किया गया,

वहीं आपको बता दें कि सीएम हेल्प लाइन पर पीएचई विभाग की सात दिन में समस्या का निवारण होना चाहिए, यानि सीएम हेल्पलाइन 181 पर कोई शिकायत दर्ज कराने के बाद वह एल-वन लेवल पर पहुंचती है। इस लेबल पर सात दिन में शिकायत का निराकरण होना चाहिए। यहां शिकायत का निराकरण न हाेने पर वह स्वत: ही एल-2 लेवल पर पहुंच जाती है। यहां कलेक्टर को सुनवाई करना होती है। यहां भी शिकायत निवारण के लिए सात दिन का समय रहता है। इसके बाद शिकायत अपने आप एल-3 लेवल पर पहुंच जाती है। यहां शिकायत संबंधित विभाग के प्रमुख द्वारा सुनी जाती है। यहां अधिकारी को विशेषाधिकार भी होता है वह चाहे तो स्वत: शिकायत को समाप्त भी कर सकता है। इसके उपरांत शिकायत एल-4 लेवल पर पहुंच जाती है। यहां शिकायत को प्रदेश स्तर के अधिकारी यानि संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव सुनते हैं। यहां भी अधिकारी को शिकायत निरस्त करने के लिए विशेषाधिकार दिए गए हैं।