✍️मनीष ऋषीश्वर
भिंड जिले में मनरेगा के मटेरियल बिल भुगतान बने गंभीर चर्चा का विषय,चुनावी वर्ष में 45.80 करोड़ के भुगतान होना लगभग तय।



कोरोना काल के दौरान हुए फर्जी कार्यों के फर्जी मूल्यांकन के बाद फर्जी मटेरियल बिलों के भुगतान करने की तैयारी जोरों पर।
भिंड जिले में सर्वाधिक गोहद और मेहगांव की पंचायतों के बिल पेंडिंग,कुल बजट का लगभग 70% भुगतान इन्हीं जनपदों को करने की तैयारी, जबकि सबसे अधिक भ्रस्टाचार की शिकायतें और जाँचे यहीं संचालित।
मनरेगा आयुक्त एस कृष्ण चैतन्य ने सभी जिलों को आदेशित करते हुए लिखा है पत्र,सभी जिलों के भुगतान जिले स्तर पर निगरानी करते हुए हों।
गोहद जनपद सीईओ दिनेश शाक्य को छुट्टी से वापस बुलाना बना चर्चा का विषय, एक तरफ उनकी बेटी की शादी की तैयारियां चल रही जोरों पर दूसरी तरफ चल रही फर्जी भुगतान करने की तैयारी,बता दें कि जनपद सीईओ ही करते हैं भुगतान और सर्वाधिक गोहद की पंचायतों को भुगतान करने की तैयारी।
नियम अनुसार जिन पंचायतों की शिकायतें प्रचलन में या फिर जिनके ऊपर वसूली के प्रकरण संचालित,उनको नहीं हो सकता भुगतान।
कलेक्टर भिंड को जिले स्तर पर बनानी चाहिए 5 सदस्यी कमेटी,जो फर्जी फ़र्मों और फर्जी बिलों एवं पंचायतों पर संचालित शिकायतों का करें परीक्षण,तभी हो भुगतान।
सूत्रों की माने तो जिले में विभिन्न पंचायतों के पूर्व सरपंचों एवं ठेकेदारों से मोटा कमीशन लेकर इकट्ठा करने की खबरें जोरों पर।
बड़ा सवाल क्या जिला पंचायत सीईओ की भी है सहभागिता या फिर सभी जनपद सीईओ अपनी रिस्क पर ही करने वाले है फर्जी भुगतान,इधर वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण की खबरें पकड़ रही जोर।
मामला एस कृष्ण चैतन्य और ए.सी.एस मलय श्रीवास्तव के संज्ञान में,बोले भ्रस्टाचार हुआ तो भुगतान कर्ताओं को धोना पड़ेगा नॉकरी से हाथ।

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