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Dharmendra Singh

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April 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

हुसैन हुसैन के नारों से गूंजेगा शहर




परासिया /आज शनिवार 29 जुलाई को मुस्लिम समुदाय के लोग दसवीं मोहर्रम के रूप में मनाएंगे । हुसैन को मानने वाले हुसैनी कर्बला वालों की याद में आज अपने – अपने क्षेत्र की नदियों के घाटों पर पहुंचेगे । शहरों की गलियां हुसैन हुसैन के नारों से गूंजेगी ।
इस्लाम के अनुसार मोहर्रम के महीने से नए साल की शुरुआत होती है । मुस्लिम समुदाय के लोगों में दसवीं मोहर्रम का विशेष महत्व होता है । वे इस महीने को गम के महीने के रूप में मनाते हैं । मोहर्रम की 1 तारीख से 10 तारीख तक शहीदाने करबला हजरत इमाम हसन हुसैन और उनके साथ कर्बला में शहीद हुए लोगों की याद में तरह तरह के आयोजन कर हुसैन और शहीदाने करबला के हक में अपनी अकीदत पेश करते हैं । कोयलांचल के विभिन्न क्षेत्रों में मोहर्रम की 1 तारीख से 10 तारीख तक लंगर बनाकर तक्सीम किया जाता है । यह सिलसिला 10 दिन तक जारी रहता है । मोहर्रम की 9 तारीख को कत्ल की रात के रूप में मनाया जाता है और अगले दिन दसवीं मोहर्रम को मुस्लिम समुदाय के लोग अपने अपने क्षेत्र की नदी के घाटों पर पहुंचकर इकट्ठा होते हैं और यहां मगरिब की नमाज अदा करते हैं । जो लोग हजरत इमाम हुसैन और हुसैन की याद में ताजिया बनाते हैं वह अपने अपने ताजियों को लेकर नदी के घाटों पर पहुंचते हैं और सूरज डूबने से पूर्व इन ताजियों को नदी में विसर्जित कर देते हैं इसके अलावा 1 तारीख से 10 तारीख तक सवारी अभी उठती है और यह भी दसवीं मोहर्रम को कर्बला पहुंचकर मगरिब के वक्त तक ठंडे हो जाते हैं । वही मन्नत के शेर भी इन 10 दिनों के दौरान शेर बनते हैं और अपने अपने परिचितों के घर जा जाकर नाचते हैं ।
*न्यूटन और छिंदा पेंच नदी पर लगता है जमावड़ा :-* मोहर्रम की दसवीं तारीख को न्यूटन और छिंदा में स्थित पेंच नदी के घाट पर आसपास के क्षेत्रों से लोग इकट्ठा होते हैं । इसी जगह ताजिया भी इकट्ठे होते हैं और शाम तक रुकने के बाद ताजियों को विसर्जित कर दिया जाता है । इसी तरह झुर्रे और शिवपुरी के समीप स्थित नदियों के घाटों पर लोगों का जमावड़ा लगता है । लोगों का नदी के घाटों पर इकट्ठा होना कर्बला का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है ।
*न्यूटन बस स्टैंड में बंटता है लंगर :-* न्यूटन बस स्टैंड में लंगर ए हुसैन कमेटी द्वारा मोहर्रम के पर्व पर हर साल बड़ा आयोजन किया जाता है । मोहर्रम की 7 तारीख , 9 तारीख और 10 तारीख को यहां लंगर बनाकर बाटा जाता है । यहीं सवारियां भी उठती हैं और इकलेहरा , भाजीपानी , बड़कुही , भमोड़ी , जाटाछापर , चांदामेटा , परासिया से लोग ताजिए लेकर , सवारियां लेकर पेंच नदी घाट पर पहुंचते हैं । जो न्यूटन बस स्टैंड में रुकते हैं और फिर यहां से कर्बला की ओर बढ़ते हैं । इस दौरान और भी लोगों द्वारा जगह जगह लंगर बांटा जाता है शरबत पिलाया जाता है ।
दीवाने गनी कमेटी द्वारा खुलवाया है रोजा :- दसवीं मोहर्रम को मुस्लिम समुदाय के अधिकांश लोग रोजा रखते हैं और रोजे की हालत में कर्बला पहुंचते हैं । यहां रोजदारों को रोजा खोलने की परेशानी से बचाने के लिए न्यूटन की दीवानी गनी कमेटी के द्वारा रोजा इफ्तार पेंच नदी घाट पर ही कराया जाता है । जिसके लिए कमेटी के द्वारा बड़ी व्यवस्था बनाई जाती है । रोजा इफ्तार में सैकड़ों की तादाद में महिला पुरुष और बच्चे रोजा इफ्तार करते हैं यह सिलसिला कई वर्षों से लगातार जारी है ।