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March 2, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

*बाराखुर्द ए एन एम उर्मिला वर्मा एवं आशा कार्यकर्ता रानी साकेत से परेशान/ हितग्राही सैया रहे कोतवाल तो काहे को डर*

बाला प्रसाद साहू रिपोर्टर

*लोकेशन मैहर*





खबर मध्य प्रदेश सतना जिले के मैहर तहसील एवं अमदरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत उपस्वास्थ्य केंद्र बराखुर्द की आशा कार्यकर्ता रानी साकेत एवम ए एन एम उर्मिला वर्मा के द्वारा गरीब आदिवासी महिलाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बेचारी गरीब भोली भाली आदिवासी महिला हितग्राही इनके दुर्व्यवहार से बहुत पीड़ित व परेशान होती हैं।
आशा व ए एन एम के द्वारा शासकीय योजना का स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाले लाभ से इन महिलाओं को वंचित करके रखें हैं। जिसको लेकर बराखुर्द अंतर्गत ग्राम अलोपा में आदिवासी महिलाओं के द्वारा बताया गया कि आशा कार्यकर्ता रानी साकेत पति कितापी साकेत एवं बराखुर्द की ए एन एम उर्मिला वर्मा इनके द्वारा गरीब अनपढ़ आदिवासी महिलाओं के साथ डिलेबरी हो जाने के बाद बोला जाता है की तुम लोग अगर 16000 की राशि का लाभ लेना चाहते हो। तो हमें 2500, 3000 रुपए दो तो हम आप लोगों को 16000 की राशि का कागज बना देंगे। तो हम गरीब आदिवासी महिला पढ़े लिखे ना होने के कारण हम लोग गरीब आदिवासी महिला 2500 रुपए की राशि हम से मांगी लिया जाती है और आज दिनांक तक किसी प्रकार से हमें इसका लाभ नहीं मिला।
अलोपा निवासी सरिता कोल द्वारा बताया गया की सन् 2021 में हमारी डिलीवरी आशा के द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदेरा करवाई गई। जिसमें हमें शासन के द्वारा जो 16000 की राशि संबल कार्ड आधार पर दी जाती है वह पैसा आज तक हमें नहीं मिला है।16000 रुपए की राशि का हमें लाभ दिलाने के लिए हमारे आशा कार्यकर्ता रानी साकेत के पति कितापी साकेत और ए एन एम उर्मिला वर्मा के द्वारा के बोला गया की 16 हजार का लाभ लेना चाहती हो तो 2500 रुपए दो।क्योंकि खर्च लगता है। और हमें ! बी एम ओ एवं बी सी एम सर सभी ऊपर के अधिकारियों को देना होता है।आशा पति कितापी साकेत एवं ए एन एम के द्वारा मांगा गया है। अगर तुम पैसा नहीं दोगी तो तुम्हारा 16000 नहीं मिलेगा। इस तरह की धमकी दी गई। जो सत्य है कि आज तक हमें नहीं मिला लाभ। इसी तरह कई हितग्राहियों से किसी से 1000, किसी से 2000, 3000 की राशि वसूली गई है आज दिनांक तक उन हितग्राहियों को 16000 रुपए की राशि का लाभ नहीं मिला। डिलेबरी 2021 में बदेरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। अब जब पैसा ना मिलने पर हम हितग्राही दी हुई राशि मांगते हैं तो आशा के पति कितापी साकेत, ए एन एम उर्मिला वर्मा के द्वारा धमकी दी जा रही है।जाओ जहां शिकायत करना हो कर दो कुछ नहीं होगा ना ही हमारा कुछ भी होने वाला है।
हितग्राही रचना कोल के द्वारा स्पष्ट शब्दों में बताया गया कि आशा कार्यकर्ता रानी साकेत के पति कितापी साकेत के द्वारा मुझसे ₹1000 वर्षों पूर्व ले गए हैं | लेकिन अभी तक मुझे कोई पैसा नहीं मिला है इसके बाद और भी पैसा मांगा जा रहा है और कहते हैं कि तुम्हारा 16000रु. आएगा अभी रुके रहो।अब मैं अपना पैसा वापस मांगती हूं तो मुझे हरिजन केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। आशा कार्यकर्ता रानी साकेत उर्मिला वर्मा की नंद हैं। इससे स्पष्ट होता है कि नंद और भौजाई मिलकर झूठे आश्वासन देकर कर रही हैं वसूली।

*एक कहावत है*
*सैया रहे कोतवाल तो काहे को डर*
एएनएम उर्मिला वर्मा, के पति हीरालाल वर्मा मैहर सिविल अस्पताल में स्वीपर सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ है। बी सी एम जितेंद्र पटेल और बी एम ओ ज्ञानेश गौतम से गहरी मित्रता होने के करण। ए एन एम उर्मिला वर्मा और उनकी नंद रानी साकेत मिलकर वसूली करती हैं। शिकायत करने पर हितग्राही एवं अन्य आशाओं पर झूठे आरोप में फंसाने एवं हरिजन एक्ट लगने की धमकियां दी जाती हैं।
आशा एवं ए एन एम के द्वारा इस तरह के दुर्व्यवहार पूर्ण कृत एवं धमकी से आहत व परेशान हम गरीब आदिवासी महिलाएं दुखी होकर शासन प्रशासन से अपनी गुहार लगा रही हैं कि उच्च स्तर से जांच करवा कर इन दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही कीजाए एवं हमारा हक हम गरीबों को दिलाया जाए।
देखना यह है कि क्या अब शासन प्रशासन एवं स्वास्थ्य अधिकारी उन गरीब आदिवासी महिलाओं को क्या न्याय दिला पाएंगे। गरीब आदिवासी महिला न्याय के लिए इधर-उधर भटकती ही रहेगी।