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Dharmendra Singh

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February 26, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

संसद भवन की सुरक्षा में सेंध एक गंभीर सुरक्षा व्यतीत : कर्नल देव आनंद
देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संसद भवन में सुरक्षा में चूक की घटना देश की आंतरिक सुरक्षा में कमि देश की सुरक्षा संस्थाओं के साथ-साथ सामान्य नागरिक की भी चिंता का एक बड़ा कारण बन गया है । 13 दिसंबर, 2001 के हमले की बरसी पर संसद में घुसपैठ करने की योजना बनाने के बाद, अलग-अलग शहरों के छह लोग दिल्ली के गुरुग्राम के एक फ्लैट में एकत्र हुए। उनमें से मनोरंजन और सागर शर्मा सार्वजनिक गैलरी से लोकसभा कक्ष में कूद गए और धुएं के डिब्बे खोल दिए, जिससे सांसदों में दहशत फैल गई, जबकि उनके साथी नीलम और अमोल शिंदे ने कनस्तरों से रंगीन गैस का छिड़काव किया और संसद भवन के बाहर जमकर नारेबाजी की । इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया की संसद के सुरक्षा चक्रव्यूह को तोड़ना क्या इतना आसान है ? यह तो सौभाग्य रहा की इस सुरक्षा की सेंद के दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
इस वारदात ने एक बार फिर से 22 साल पुराने उस आतंकी घटना की याद ताजा कर दी, जब पाकिस्तानी आतंकियों ने 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद परिसर पर हमला किया था और गोलियों की तड़तड़ाहट से देश सहम उठा था. जिसमें सुरक्षाकर्मियों समेत नौ रनबानकुरों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था और 18 नागरिक घायल हुए थे। बस गनीमत ये रही कि कोई सांसद इनका निशाना नहीं बना।
यह घुसपैठ अमेरिका में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून द्वारा जारी चेतावनी के बीच हुई है, जिसने हाल ही में एक वीडियो धमकी जारी की थी, जिसमें 13 दिसंबर या उससे पहले संसद पर संभावित हमले का संकेत दिया गया था। हालांकि घटना के जवाब में इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी लेकिन इस तरह की घटना का घटित होना सुरक्षा तंत्र में खामी होने के संकेत साफ-साफ देता है । यह एक सोची समझी करवाई जो रणनीति के तहत की गई प्रतीत होती है।
हाल ही में हुई संसद की सुरक्षा में चूक की जांच पूर्ण होने के पश्चात पाई जाने वाली कमियों को दूर करते हुए सरकार एवं सुरक्षा एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में ऐसी सुरक्षा में चूक नहीं होनी चाहिए ….