दंदरौआ धाम में महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 रामदास जी महाराज जी के सानिध्य में चल रही श्री मद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रोताओं ने झूम झूम कर कृष्ण जन्म की कथा का आनंद उठाया कथा के मध्य कथा का वाचन आचार्य सत्यम दुबे जी महाराज उज्जैन करा रहे हैं उन्होंने कथा में बताया चारों युगों में राक्षस हुए सतयुग में हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यपु हुए त्रेतायुग में रावण कुंभकरण आदि राक्षस हुए और द्वापर युग में कंस दुर्योधन आदि राक्षस हुए और कलयुग में भी राक्षस है जिसका नाम (मैं) अहम घमंड है और यही इंसान का शत्रु हैं मनुष्य जीवन अच्छे कर्म के लिए मिला हैं इसे भक्ति में उपकार में लगाओ
हृदय सरल रखो प्रभु सरल हृदय वालों को मिलते हैं
मोहे कपट छल छिद्र न भावा
यही प्रभु कहते हैं और आगे कथा में महामंडलेश्वर महाराज जी ने श्रोताओं को अपनी वाणी से आशीर्वाद प्रदान किया उन्होंने बताया सौ काम छोड़ कर भोजन करो हजार काम छोड़ कर स्नान करो
लाख काम छोड़ कर जिसका लिया हैं इसका दो और करोड़ों काम छोड़ कर भगवान का भजन करो आप सभी श्रोता बड़े भाग्यशाली है हमारे सत्यम शास्त्री उज्जैन में निवास करते हैं यहीं के विद्यार्थी रहे हे और तीर्थ में निवास करने वाले वक्ता से कथा सुनना भाग्यशाली होना होता हैं
जय श्री राधे
दंदरौआ सरकार की जय
गिरजेश पचौरी पत्रकार मेहगांव मोबाइल नंबर 9926264754

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