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Dharmendra Singh

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May 22, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

*आष्टा -:

 

तपस्चर्या साधु का गुण होती है । रत्नत्रय के साधक दिगम्बर साधुओं के लिए कठोर साधना आत्मा के अलंकार का कारण होती है । तन के प्रति निर्मोही और मन मे वात्सल्य लिए आत्म धन की प्राप्ति का पुरुषार्थ करने में लीन साधु संघ की हर चर्या में शास्त्रीय लालित्य और गुरु निर्देश के पालन की प्रतिबद्धता झलकती है ।

नगर में विराजित आचार्य विद्यासागरजी महाराज के संज्ञा उपदेशी संघ के चारो ही श्रमणों के सानिध्य में पुण्य लाभार्थी श्रावकों की धर्मानुभूति नवीनता का संचय कर रही है । परस्पर प्रेरक यह साधु संघ कठोर तपस्चर्या में आत्म परीक्षक के रोल में दिखाई देते हैं ।

जैन धर्म मे पर्व निग्रह और संयम के प्रति उत्साह का कारण बनते हैं । चातुर्मास में साधु संघ का ठहराव श्रावकों के हित का कारण तो बनता ही है यह सांस्कृतिक मूल्यों और धर्म की मजबूती का कारण भी बन जाता है ।

इस दिव्य वातावरण में चारों ही मुनिराज अपनी दिव्य देशना और तपोबल से समाज को उपकृत कर रहे हैं वहीं उनकी प्रेरणा श्रावकों को भी धर्मपथ पर निरन्तर अग्रसर कर रही है ।

विगत दिनों संघस्थ मुनि निष्कम्प सागर जी ने जैन धर्म के सोलह कारण पर्व पर निर्धारित 32 दिनों में सोलह उपवास करके भावनाओं के सौपान पर उत्तरोत्तर चढ़ने का आध्यत्मिक उपक्रम करके साधकों के समक्ष प्रभावना और पुरुषार्थ का आदर्श प्रस्तुत किया ।

मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में दिगम्बर जैन धर्म मे आत्म कल्याण और तीर्थंकर प्रकृति का मार्ग प्रशस्त करने वाले सोलह कारण धर्म पर प्रवचन और इन भावनाओं के उपयोग हेतु एक पारणा और एक उपवास की साधना भी की । साथ ही इस पर्व पूर्णता के अवसर पर 72 घण्टे के निर्जला उपवास और सिद्धासन लगा कर अविचल ध्यान मुद्रा में 48 घण्टे तक कायोत्सर्ग भी किया ।

जैनत्व में अनुमोदन और अनुसरण का बड़ा महत्व है । मुनि श्री निष्कम्प सागर जी की साधना और तपस्चर्या के फलस्वरूप श्रावकों में आस्था और त्याग की प्रवृत्ति बढ़ना स्वाभाविक है । परम् पूज्य संघ प्रमुख मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी , मुनि श्री निष्काम सागर जी , मुनि श्री निस्पृह सागर जी मुनि श्री निष्कम्प सागर जी के दिव्य सानिध्य में हो रही अभूतपूर्व धर्म प्रभावना के बीच जैन समाज के युवक युवतियों और बच्चों में भी धर्म के प्रति बढ़ते अनुराग की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है । जानकारी साझा करते हुए संजय जैन किला ने बताया कि मुनि श्री निष्कम्प सागर जी के त्रय उपवास के बाद श्रेष्ठ श्रावक प्रकाश जैन श्रीमती सोनू जैन तथा श्रीमती संगीता सेठी के चौके में आहार सम्पन्न हुआ ।

इधर जैन पंचायत कमेटी द्वारा पर्युषण पर्व के समापन पर सभी उत्कृष्ट श्रावकों एवम तपस्वी समाज बंधुओं का सम्मान किया गया ।

 

आष्टा से किरन रांका की रिपोर्ट