Chief Editor

Dharmendra Singh

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May 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

कई सालो से एक ही थाना बरही में पदस्त प्रधान आरक्षक अनिल ठाकुर बेच नंबर 53 हैं विवेचक मगर आज तक नहीं की कोई विवेचना कौन अधिकारी है मेहरबान जो रुकवा लेते है अपना ट्रांसफर जिम्मेदार पुलिस अधिकारी मौन…….?

कई सालो से एक ही थाना बरही में पदस्त प्रधान आरक्षक अनिल ठाकुर बेच नंबर 53 हैं विवेचक मगर आज तक नहीं की कोई विवेचना कौन अधिकारी है मेहरबान जो रुकवा लेते है अपना ट्रांसफर जिम्मेदार पुलिस अधिकारी मौन…….?

कटनी जिले के कई थानो में यही मामला सामने कई बार आया की कुछ पुलिस कर्मी अपने दबदबे के कारण एक ही थाने में अपना दबदबा बनाये रखने और अवैध वसूली के कार्य करने के लिये जाने पहचाने जाते है मगर कई ईमानदार बड़े अधिकारियो के द्वारा इनका ट्रांसफर कर भी दिया गया उसके बाद भी उसी थाने सेवा दे रहें है मगर किसी भी जिम्मेदार बड़े पुलिस अधिकारी नें इन मामले में अपनी नज़र डालना जरुरी नहीं समझा और कई सालो से जमे पुलिस कर्मी थाने में अपना दबदबा कायम रखने के लिये भ्र्स्ट अधिकारी के साथ मिलकर राज करते है और अवैध वसूली कर अपनी जेब गर्म करते रहते है अवैध गतिविधियों और नंबर दो के कामों में भी इन्ही पुलिस कर्मियों की साठ – गांठ दिखाई देती है इसी प्रकार का एक मामला सामने आया है जो कटनी जिले के बरही तहसील के थाना बरही में पदास्त प्रधान आरक्षक अनिल ठाकुर विगत दस वर्षो से बरही थाना में सेवा दे रहें है और अपना कार्य जोरो से कर रहे है सूत्रों के अनुसार अनिल ठाकुर नें आज तक किसी विवेचना में अपना हाथ नहीं बटाया मगर प्रधान आरक्षक का पद मिल जाने के बाद उनकी पद में विवेचक जुड़ गया सूत्र बताते है की अनिल ठाकुर बेच नंबर 53 के द्वारा बरही थाना का हर सेटलमेन्ट इन्ही के द्वारा किया जाता है क्योंकि पुराने पुलिस कर्मी होने का फायदा तो होना चाहिए हर अपराधि और दो नंबर के कार्य करने वालों की पहचान अच्छी होती है पुराने पुलिस कर्मियों को जनता की मांग है की कटनी जिले के हर थाने में तीन साल से ज्यादा सेवा दे चुके पुलिस कर्मियों को दूसरे तहसील या जिले में ट्रांसफर होना चाहिए जिससे की जिले में अपराध और अन्य गतिविधियों में कमी आ सके और दूसरे पुलिसकर्मियों को नये थाना और नई जगहों का अनुभव प्राप्त हो सके मध्यप्रदेश ग्रह विभाग और जिला पुलिस अधीक्षक से जनता की मांग है की कई सालो से एक ही थानो में सेवा दे रहें पुलिस कर्मियों को थाना बदल का कार्य किया जाये जिससे छेत्र में अवैध कार्य और अपराध में रोक लगाई जा सके

 

10 वर्षों से एक ही थाने में लगातार पदस्थ रहने का मामला किसी भी केस में सार्थक विवेचना (इंवेस्टिगेशन) ना करने का आरोप

अवैध वसूली, सेटलमेंट और नंबर दो के कामों में साठगांठ के गंभीर आरोप

प्रभावशाली संरक्षण (किसी “मेहरबान अधिकारी”) के चलते ट्रांसफर न रुकना

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस पर मौन धारण करना

⚠️ जनता और प्रशासन के बीच उठते प्रश्न

🔍 क्या पुलिस में पारदर्शिता है…….? जब एक पुलिसकर्मी 10 वर्षों तक एक ही थाने में सेवा करता है, तो यह ट्रांसफर पॉलिसी की खुली अवहेलना मानी जा सकती है।
👥 जनता के साथ न्याय? यदि ऐसे कर्मियों द्वारा जांच नहीं की जाती और वसूली की जाती है, तो आम नागरिक की रिपोर्ट पर न्याय कैसे मिलेगा……?
🤝 किसका संरक्षण.…..? “कौन अधिकारी है मेहरबान…….?” — यह सवाल स्पष्ट रूप से बताता है कि किसी उच्च अधिकारी की अनदेखी या साठगांठ भी शक के घेरे में है।

📑 DGP या गृह विभाग की नीति……? क्या 3 साल में ट्रांसफर की व्यवस्था केवल कागजों पर ही सिमित है

📢 जनता की मांगें

1. 10 वर्षों से एक ही थाने में तैनात पुलिसकर्मियों का तत्काल ट्रांसफर किया जाए।

2. प्रधान आरक्षक अनिल ठाकुर की अब तक की विवेचनाओं की जांच हो।

3. जिन वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रांसफर रोका है, उनकी भूमिका की भी जांच की जाए।

4. जिले के सभी थानों की पोस्टिंग की समयसीमा सार्वजनिक की जाए।

5. अवैध वसूली और नंबर दो के कामों में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए

“एक ही जगह लंबे समय तक पदस्थ पुलिसकर्मी ना केवल शक्ति का दुरुपयोग करते हैं, बल्कि भ्रष्टाचार और स्थानीय अपराधियों से सांठगांठ के केंद्र बन जाते हैं।”
इसलिए जनता की यह मांग न केवल जायज है, बल्कि कानून और व्यवस्था की मजबूती के लिए अनिवार्य भी…..?