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Dharmendra Singh

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May 17, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

शिवपुरी से जिला ब्यूरो चीफ अजय शर्मा

सचिव की लापरवाही बनी ग्रामीणों की परेशानी — ग्राम पंचायत आहारबानपुर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार

खनियाधाना (शिवपुरी)।
ग्राम पंचायत आहारबानपुर, जो खनियाधाना जनपद के अंतर्गत आती है, इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर दौर से गुजर रही है। पंचायत में पदस्थ सचिव की अनियमित उपस्थिति और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अब ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की बड़ी समस्या बन गया है।

सचिव का पंचायत भवन से गायब रहना बनी सबसे बड़ी समस्या

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव महीने में गिने-चुने दिन ही पंचायत भवन पर आते हैं, वह भी केवल औपचारिकताओं के लिए। उनकी इस लापरवाही के चलते ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति और निवास प्रमाण पत्र, मनरेगा से संबंधित कार्य, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम आवास योजना, तथा अन्य कई जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने दुख जताते हुए कहा:

> “हम जैसे अनपढ़ लोगों को समझ नहीं आता कि कहां जाएं, क्या करें। सचिव जी आते ही नहीं हैं। कोई कागज बनवाना हो तो महीनों लग जाते हैं।”

ग्राम पंचायत का विकास कार्य प्रभावित

ग्राम पंचायत में मनरेगा मजदूरी का भुगतान, आवास निर्माण की किस्तें, और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण जैसे कार्य पूरी तरह अटके हुए हैं। वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और जनकल्याण योजनाओं के आवेदन भी सचिव की अनुपस्थिति के कारण लंबित पड़े हैं।

शिकायतों का भी नहीं हो रहा असर

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर जनपद पंचायत कार्यालय और अन्य उच्च अधिकारियों को कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें दी हैं। लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन के प्रति ग्रामीणों का विश्वास डगमगाने लगा है।

क्या बोले स्थानीय जनप्रतिनिधि….?

जब इस विषय पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों से बात की गई, तो उन्होंने भी सचिव की अनुपस्थिति को स्वीकार किया।

> “हमें भी इस बात की चिंता है। कई बार उन्हें बुलाया गया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इससे पंचायत के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।”

 

जनहित में उठते सवाल:

क्या जनपद पंचायत प्रशासन सचिव की जवाबदेही तय करेगा?

क्या ग्रामीणों को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा?

कब तक सचिव की मनमानी ग्रामीणों पर भारी पड़ती रहेगी?

क्या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?

 

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

1. सचिव की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

2. पंचायत भवन में साप्ताहिक जनसुनवाई शुरू की जाए।

3. लंबित कार्यों और योजनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जाए।

4. सचिव के कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए।

5. पंचायत स्तर पर जवाबदेही प्रणाली विकसित की जाए।