महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट
सनातन धर्म में दत्तात्रेय जयंती का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान दत्तात्रेय का जन्म होने के कारण, हर साल इस दिन को उत्साह से मनाया जाता है। साल 2025 में दत्तात्रेय जयंती का पर्व 4 दिसंबर, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस पर्व को दत्त जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त अवतार बताया गया है। मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की पूजा से त्रिदेवों की आराधना के बराबर का फल प्राप्त किया जा सकता है।

दत्त जयंती, जिसे दत्तात्रेय जयंती भी कहते हैं, मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है और इसे हिंदू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के संयुक्त अवतार भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था, इसलिए इसे त्रिदेवों के आशीर्वाद के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पूजा-पाठ और गंगा स्नान करने से सुख-समृद्धि मिलती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
दत्त जयंती के बारे में
महत्व: यह जयंती त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) के संयुक्त अवतार भगवान दत्तात्रेय के जन्म का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, शांति और ज्ञान प्राप्त होता है।
शुभ फल: इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
पूजा विधि: भगवान दत्तात्रेय की पूजा करते समय उन्हें चंदन,और सुगंध वाली अगरबत्ती अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान ‘श्री गुरुदेव दत्त’ का जप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
सात्विक वेशभूषा: इस दिन सात्विक वेशभूषा धारण करने से अधिक लाभ होता है।
पितृ दोष निवारण: जिन लोगों को पितृ दोष है, उन्हें दत्त जयंती पर उनके मंत्रों का जाप करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी अनसुइया के सतीत्व की परीक्षा के लिए त्रिदेव साधु के वेश में उनके आश्रम पहुंचे थे।
जब देवी अनसुइया ने उनकी सेवा की, तो त्रिदेवों ने एक ही शिशु के रूप में जन्म लिया। इस प्रकार, महर्षि अत्रि और देवी अनुसुइया के पुत्र के रूप में भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ
इस पावन अवसर पर सभी भक्तजन को दत्त जयंती की शुभकामनाये….

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