महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…
महाराष्ट्र
राज्य जिला गडचिरोली
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर आष्टी पोलीस स्टेशन PSI श्रीमती अपेक्षा मेश्राम ने किया नमन….
आष्टी PSI श्रीमती अपेक्षा मेश्राम जनसमूह को संबोधित करते हुवे कहा की आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती समारोह का आयोजन अनखोडा गाव के नागरिक द्वारा किया गया था l
आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती समारोह में सभी पदाधिकारियों द्वारा सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। सावित्रीबाई फुले ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों और महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 09 साल की उम्र में 1841 में महात्मा ज्योतिराव फुले से हुआ था।
सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल बनी l
सावित्रीबाई का संघर्ष केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं था बल्कि इन्होंने छुआछूत, बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ डटकर लड़ाई लड़ी। इन्होंने विधवाओं के मुंडन को रोकने के लिए नाईयों की हड़ताल आयोजित की और ‘बालहत्या प्रतिबंधक गृह’ की स्थापना की।
इन्होंने दलितों और पिछड़ों के लिए अपने घर का पानी का हौद खोल दिया, जो उस समय के समाज में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम था। सावित्रीबाई एक संवेदनशील कवयित्री भी थीं। इनकी प्रसिद्ध कृतियों में ‘काव्य फुले’ और ‘बावनकशी सुबोध रत्नाकर’ शामिल हैं, जिसमें इन्होंने शिक्षा और समानता का संदेश दिया है। 1897 में जब पुणे में ‘प्लेग’ की महामारी फैली, तो वे रोगियों की सेवा करते हुए खुद इस बीमारी की चपेट में आ गईं और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया।
जयंती समारोह में अनखोडा गाव के सभी नागरिक उपस्थित थे l
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…

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