महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली कर्तव्यदक्ष पोलीस अधीक्षक श्री निलोत्पल द्वारा महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण योगदान मे अग्रदूत डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जयंती की शुभकामनाये…
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वर्ष 1891 में भारत को उपेक्षित और वंचित समाज के कल्याण के लिए क्रांतिसूर्य, बोधिसत्व, भारतरत्न, विश्वरत्न, महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के रूप में आशा की एक नई किरण मिली। उन्होंने सदियों से अंधेरे में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों को ‘इंसान’ के रूप में जीने का अधिकार दिलाया।
महिलाओं के उत्थान में योगदान
भारत की सभी धर्मों की महिलाओं की प्रगति में बाबासाहेब का बहुत बड़ा योगदान है। दुर्भाग्य से, आज भी कई महिलाओं को यह नहीं पता कि उन्हें ये सभी अधिकार और हक वास्तव में कैसे मिले। यदि हम वैश्विक लोकतंत्र का इतिहास देखें, तो पता चलता है कि दुनिया भर में महिलाओं को मतदान का अधिकार पाने के लिए बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ा। भारत में महिलाओं को मतदान का अधिकार 1952 में मिला।
भारत की विशिष्ट स्थिति
भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां महिलाओं को मतदान के अधिकार के लिए कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा। इसका पूरा श्रेय बाबासाहेब को जाता है। जिस दिन भारत का संविधान लागू हुआ, उसी दिन से महिलाओं को पुरुषों के समान मतदान और अन्य सभी अधिकार प्राप्त हो गए।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रमुख कार्य:
1. हिंदू कोड बिल
कानून मंत्री रहते हुए बाबासाहेब ने महिलाओं को संपत्ति, विवाह, उत्तराधिकार और तलाक में समान अधिकार देने के लिए ‘हिंदू कोड बिल’ का मसौदा तैयार किया। इस बिल के कारण महिलाओं को:
पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिला।
तलाक लेने का कानूनी अधिकार प्राप्त हुआ।
बहुपत्नी प्रथा पर रोक लगी।
अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को कानूनी मान्यता मिली।
बेटा या बेटी गोद लेने का अधिकार मिला।
(उस समय इस बिल के पूरी तरह से पारित न होने के कारण, बाबासाहेब ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।)
2. सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा
बाबासाहेब ने संविधान के माध्यम से विधवा महिलाओं को सम्मान के साथ पुनर्विवाह करने का कानूनी अधिकार दिया।
कामकाजी महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) और समान वेतन जैसे प्रावधान किए, ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम हो सकें।
3. राजनीतिक और संवैधानिक अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और अवसर की समानता जैसे मौलिक अधिकार दिए।
लिंगभेद की दीवारों को तोड़कर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की।
4. शिक्षा और स्वावलंबन
बाबासाहेब का दृढ़ मत था कि “शिक्षा ही महिलाओं की मुक्ति की कुंजी है।” उन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल, छात्रावास और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के लिए जीवन भर जोर दिया।
5. सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध संघर्ष
उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा और बहुपत्नी प्रथा जैसी सामाजिक कुप्रथाओं की कड़ी आलोचना की। उनका मानना था कि जब तक महिलाएं इन बेड़ियों से मुक्त नहीं होंगी, तब तक समाज का विकास संभव नहीं है।
6. आत्मसम्मान की प्रेरणा
1930 के दशक में उन्होंने महिला परिषदों का आयोजन किया और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। वे कहते थे:
“मैं किसी समाज की प्रगति उस समाज की महिलाओं द्वारा की गई प्रगति से मापता हूं।”
निष्कर्ष
आज भारत में महिलाएं जिस आत्मविश्वास के साथ शिक्षा, नौकरी, राजनीति और संपत्ति के अधिकारों का आनंद ले रही हैं, उन सभी के बीज बाबासाहेब ने ही बोए थे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं थे, बल्कि वे सही अर्थों में भारत में स्त्री-मुक्ति और महिला सशक्तिकरण के अग्रदूत थे।
भारत में 5,000 जातियां और 1,600 भाषाएं बोलने वाले समुदाय हैं, उन सभी के लिए उन्होंने एक ऐसा सुंदर संविधान लिखा जिसमें सबका सुख समाया है। ऐसे क्रांतिसूर्य को विनम्र अभिवादन!
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट…..


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