Chief Editor

Dharmendra Singh

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February 2026
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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

*मध्यप्रदेश के चेतन 11 वर्षों की भारत यात्रा कर जगायेंगे सौर ऊर्जा के प्रति जनचेतना

*आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एनर्जी स्वराज यात्रा को दिखाएंगे हरी झंडी*

*एनर्जी स्वराज यात्रा की सोलर चलित बस से मिंटो हॉल से स्टेट हेंगर तक जाएंगे मुख्यमंत्री*

प्रो. सोलंकी 11 वर्षों तक सतत इस बस के माध्यम से ही सम्पूर्ण भारत में घूमेंगे जो मीटिंग, ट्रेनिंग देने हेतु सभी तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित है।

*मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के झिरनिया तहसील के छोटे से गांव नेमिच से है प्रो चेतन सोलंकी*

*आईआईटी।मुम्बई के।छात्र रह चुके है चेतन सोलंकी*

*प्रो सोलंकी, सौर ऊर्जा की जनजागृति के लिए 11 वर्षो तक अब अपने परिवार से पूरी तरह दूर रहेंगे*

*चेतन पिछले 20 वर्षों से सौर ऊर्जा पर कार्य कर रहे रहे हैं*

*IEEE संस्था द्वारा सौर ऊर्जा में नवाचार एवं शोध के लिए 10 हज़ार डॉलर का प्राइज जीत चुके है प्रो सोलंकी*

*प्राइम मिनिस्टर अवार्ड फ़ॉर इनोवेशन के विजेता भी रह चुके है सोलंकी*

*प्रो.सोलंकी को टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू और इंडिया टुडे ने “सोलर मैन ऑफ इंडिया” के रूप में नामित किया है*

*प्यार से लोग उन्हें “सौर गांधी” भी कहते हैं।*

*सौर के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए जाना जाता है, वह एक शिक्षक, नवोन्मेषक, शोधकर्ता, उद्यमी, लेखक हैं। वैज्ञानिक होने के साथ ही वह सौर प्रौद्योगिकी से संबंधित कई राष्ट्रीय समितियों के सदस्य हैं।*

*गांधी जी के आदर्शों का पालन करते हुए उन्होंने ‘ऊर्जा स्वराज’ शब्द गढ़ा है।*

ऊर्जा स्वराज आंदोलन,लोगों तक ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा स्थिरता आवश्कयता और जलवायु परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनांदोलन के रूप में कार्य कर रही है।

*यह ऊर्जा स्वराज यात्रा 26 नवंबर 2020 से शुरू होकर दिसंबर 2030 तक , जो लगभग 11 साल चलेगी।, ताकि ऊर्जा स्वराज को एक सार्वजनिक आंदोलन बनाया जा सके, लोग ऊर्जा के उपयोग और भविष्य में आने वाले संकटों के प्रति सचेत हो सकें ।*

*शत प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुशासित तरीके से सौर समाधान को अपनाने के लिए यह यात्रा बड़े पैमाने पर आयोजित हो रही है।

*यह यात्रा समाज में एक समझ और व्यावहारिक स्वीकृति लाने का कार्य करेगी।

*ऊर्जा स्वराज तभी सार्वजनिक आंदोलन बन सकता है जब जनता किसी भी सरकारी नीति या सब्सिडी ढांचे के बावजूद सौर ऊर्जा समाधानों को अपनाने में अपने उत्तरदायिव को समझे। तभी हम अपने देश प्रदेश को आत्मनिर्भर की दिशा में सक्षम बना सकेंगे