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April 7, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

नरेंद्र राय रिपोर्टर

धर्म विरोधी ताकते सनातन संस्कृति पर कुठाराधात कर रही हैः- जगत गुरु रामस्वरुपाचार्य महाराज।
नगर के हेलीपेड मैदान में किया जा रहा है रामकथा का आयोजन।
(फोटो संलग्न-02)
एंकर सिलवानी निरंतर धार्मिक आयोजन करते रहना चाहिए ।धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति को जाग्रत करने का कार्य करते है।  संत, महात्माओ, महापुरुषो का आषीर्वाद सदा ही सद् पुरुषो के साथ रहता है।  क्षेत्र के घर्म प्रेमी श्रद्वालुओ पर जाते जाते आषीर्वाद का खजाना खाली कर जाउंगा। सिलवानी नगर में निकाली गई एतिहासिक कलष यात्रा से में अभिभूत हूं।
      यह उद्गार जगत गुरु स्वामी राम स्वरुपाचार्य महाराज चित्रकूटधाम ने व्यक्त किए। नगर में श्रीराम कथा का पांच दिवसीय आयोजन  हिंदु उत्सव समिति के बेनर तले किया जा रहा है। रविवार को कथा का द्वितीय दिवस था।
     उन्होने बताया कि श्रद्वा व उत्साह से ही श्रद्वालु कार्यक्रम में होते है। धर्म बिरोधी ताकतो पर प्रहार करते हुए जगतगुरु ने कहा कि तुमने हथियार बनाना सीखा है जवकि हमने पत्थर से भगवान बनाना सीखा है। उन्होने कहा कि हिंदुओ संगठित व सक्रिय रहो। ताकि हिंदू बिरोधी ताकते, धर्म विरोधी ताकते सनातन संस्कृति पर कुठाराधात ना कर सके।
      रामकथा को ब्रम्हचारी जी महाराज वापोली धाम, मानस रत्न अषोक दास रामायणी ब्रम्हचारी जी धाम अयोध्या ने भी संबोधित किया। ब्रम्हचारी जी महाराज वापोली धाम ने कहा कि सत्संग के बगैर विवेक आना संभव नही है। सत्यंग है तो विवेक हक्। व्यक्ति को सदा ही महापुरुषो का सत्संग करते  रहना चाहिए । जहां भीसत्संग करने का अवसर मिले उसे जाया नही करना चाहिए । अंधेरे में बैठ कर लाईट की चर्चा करने से लाईट नही आती है। जवकि लाईट का प्रकाष करने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। महापुरुषो की वाणी सुनकर आचरण में उतारने पर ही वाणी सुनना सार्थक होता है।
         मानस रत्न अषोक दास रामायणी ब्रम्हचारी जी धाम अयोध्या ने कहा कि भगवान हमेषा ही भक्तो के साथ रहते है। लेकिन आवष्यकता इस बात की है कि  भक्त भी भगवान के बताए रास्ते पर चले । ताकि भगवान का साथ हमेषा ही मिलता रहे । उन्होने श्रीराम के वन गमन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीराम ने माता सीता से कहा कि तुम वन के संकटो का सामना नही कर पाओगी। लेकिन सीता ने कहा कि श्रीराम साथ है तो कष्ट का आभास भी नही होगा । माता सीता ने यह भी श्रीराम से कहा कि जिस प्रकार शरीर में जीव, नदी में पानी क बगेर कोई अस्तित्व नही होता है उसी प्रकार पति के बगैर पत्नि का भी कोई अस्तित्व नही होता हैं। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुंच रहे है।