Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 18, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

सिराली गुप्तेश्वर महादेव पर श्रद्धालुओं द्वारा माँ नर्मदा के जल से किया गया जलाभिषेक, शिवरात्रि से कृषि मंत्री कमल पटेल ने किया मेले का शुभारंभ।

ब्रजेश पाटिल रिपोर्टर

जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी की दूरी पर खिरकिया तहसील से करीब 10 किमी. चारूवा के निकट ग्राम हरिपुरा माल में 10-11वीं शताब्दी ई. में निर्मित श्रीगुप्तेश्वर महादेव मंदिर निमाड़ एवं भुआणा अंचल के लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार यहा चार बाबड़ी में उपलब्ध मौढ़ी लिपि के एक शिलालेख से यह स्पष्ट होता है कि यह गांव पहले चानरवा के नाम से विख्यात था। जो कालांतर में चारुवा के नाम से जाना गया। महाशिवरात्रि पर यहा दूर दूर से श्रद्धालु आकर गुप्तेश्वर महादेव पर मां नर्मदा नदी का जलाभिषेक किया जाता है, वही राजस्व विभाग के तहसीलदार एवं पटवारी द्वारा भी मेन गेट पर गुप्तेश्वर महादेव पर जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं को जल वितरण किया गया है, वही आपको बता दे की प्रतिवर्ष अनुसार शिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान भोलेनाथ की पालकी एवं झाकी निकाली जाती है, जिसमें दूर दूर से श्रद्धालु देखने के लिए आते हैं, वही प्रतिवर्ष यहां मेले का आयोजन किया जाता है। शिवरात्रि से मध्यप्रदेश शासन के कृषि मंत्री कमल पटेल द्वारा इस मेले का शुभारंभ किया गया, मेले में घुमने के लिए लाखो लोग पहुंचते है। यहा साल भर में करीब 25 लाख से अधिक लोग गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन कर मेले का आंनद लेते हैं।

*यहा लोगों का कहना है कि बडे टीले की खुदाई में निकला था विशाल मंदिर*

आसपास के गावों के लोगों का कहना यहां पहले घना जंगल के बीच बंजारी टीला था 1870 के आसपास इस क्षेत्र में अकाल पड़ा। तब एक साधु की सलाह पर गांव वालों ने इस टीले की पूजा-अर्चना की। इसके बाद क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई। इस चमत्कार से प्रभावित होकर लोगों ने टीले की खुदाई शुरू की। इसमें पहले शिखर और फिर पूरा मंदिर प्रकट हुआ। मंदिर पाषाण का एक भव्य शिवलिंग तथा कई मूर्तियां निकली। इसके बाद मंदिर का जीर्णोंद्धार कर पूजन की व्यवस्था की गई।

*मंदिर प्रांगण में महाभारत कालीन चक्रव्यूह भी बना हुआ है*

कहा जाता है महाभारत में चक्रव्यूह भेदने के लिए अभिमन्यु अकेले ही उतरा था, लेकिन आखिरी चक्रव्यूह में प्रवेश करते ही कौरव सेना ने युद्ध के नियम को तोड़ते हुए अभिमन्यु को घेरकर उसका वध कर दिया. महाभारत में अभिमन्यु तो चक्रव्यूह नहीं भेद सका, लेकिन गुप्तेश्वर मंदिर में बना चक्रव्यूह रचने और भेदने का खेल आज भी खेला जाता है, इसमें कई घण्टे खेलने के बाद भी जीत-हार का फैसला नहीं हो पाता, मुख्य रूप से यहा पर आज भी सभी लोग चक्रव्यूह का खेल खेलते रहते हैं,