
आकाशीय विजली गिरने की लगातार बढ़ती घटनाएं कही जिमेदार यह तो नही…?

ग्वालियर:- मौसम बरसात का चल रहा है प्राय देखने को मिल रहा है कि कहीं पर जल तांडव मचा हुआ है तो कहीं पर आसमान से गिरने वाली बिजली अग्नि तांडव मचा रही है देखने में यह भी आ रहा है कि पिछले कई वर्षों की अपेक्षा जिले में इस बार बिजली गिरने की घटनाएं कुछ ज्यादा देखने सुनने को मिल रही है, इनके अलग-अलग कारण भी हो सकते हैं लेकिन मुख्यता माना जाता है कि बिजली किसी पेड़ पर टावर पर या जिस जगह से बिजली के प्रवाह को सीधे जमीन तक पहुंचने का रास्ता मिले विजली उस जगह पर अधिक गिरती है।

आज जहां पर डिजिटल इंडिया का जमाना है तो वहीं पर हर गांव हर कस्बे तक मोबाइल अपनी पकड़ बना चुके हैं इनके नेटवर्क को दुरुस्त रखने के लिए कंपनियों ने जगह-जगह अपने मोबाइल टावर भी लगा रखे हैं जिनमें मानकों की बड़ी लापरवाही संबंधित अधिकारियों के ध्यान देने पर उजागर हो सकती है देखा जाए तो अधिकांश मोबाइल टावरों पर तड़ी चालक यंत्र नहीं लगा रखे हैं नाही मोबाइल टॉवरों पर इंडिकेशन लाइट जलती है माना जाता है कि तड़ी चालाक में लगने वाली प्लेट कॉपर की होती है जिसका खर्चा अधिक होता है इस लिए कंपनियों ने य तो टावरों पर यह यंत्र नही लगा रखे है य जिन्होंने लगाए वो चोरी हो जाने पर दोबारा नही लगाए गए है, जिससे मोबाइल टावर लगे हुए इलाको में आकाशीय विजली गिरने का खतरा और बढ़ जाता है, इतना ही नही कुछ कंपनियों के मोबाइल टावर तो डिफेंस एरिया के पास भी लगे हुए हैं जहां सेना के विमानों की आवाजाही भी रहती है उन कंपनियों ने तो वहां के मोबाइलों टावरों पर भी न तड़ी चालक लगाए है न ही टॉवरों पर जलने वाली इंडिकेटर लाइट जला रखी है जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है नियमों को ताक पर रखकर कारोबार चला रहे मोबाइल कंपनियों पर यदि संबंधित अधिकारी ध्यान देते हैं तो कोई भी बड़ी अनहोनी या बड़ी घटनाएं घटने से पहले उन्हें रोका जा सकता है।

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