विशाल भौरासे रिपोटर

कलेक्टर श्री अमनबीर सिंह बैंस द्वारा किसानों की सुविधा के दृष्टिगत जिले में विकासखंडों के अंतर्गत गठित क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में खरीफ 2022 में बोई गई फसलों में होने वाले कीट एवं रोगों के लक्षण एवं उपचार के लिए प्लांट क्लीनिक दल का गठन किया गया है।
प्लांट क्लीनिक दल संबंधित क्लस्टर में प्रथम पाली में प्रात: 10.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक एवं द्वितीय पाली में दोपहर 2.30 बजे से सायं 5.30 बजे तक किसानों को पौध रोग एवं कीटों के उपचार संबंधी सलाह देंगे। इस दौरान क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी/कृषि विकास अधिकारी/एटीएम/बीटीएम उक्त क्लस्टर में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे एवं संबंधित किसानों को पूर्व में सूचित कर उक्त क्लस्टर स्थल पर लाने के लिए प्रेरित करेंगे। संबंधित क्लस्टर के ग्राम पंचायत भवन में यह प्लांट क्लीनिक आयोजित होगा।
प्रशिक्षण आयोजित
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कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल बाजार में शुक्रवार को कृषि विभाग का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अमनबीर सिंह बैंस विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में उप संचालक कृषि द्वारा विस्तार कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मुख्य फसलों सोयाबीन, मक्का, अरहर, धान एवं अन्य में होने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों के लक्षण एवं उपचार की जानकारी दी गई है, उसकी संबंधित क्लस्टर के किसानों को विस्तृत जानकारी दें। साथ ही किसानों की उर्वरक पोषक तत्व प्रबंधन पर भी किसानों को समझाइश दें।
पौध संरक्षण विशेषज्ञ श्री आरडी बारपेटे ने सोयाबीन एवं मक्का में मुख्य रूप से होने वाले कीट एवं रोगों के बारे में पावर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। इस दौरान फाल आर्मी वर्म, शीथ ब्लाइट, तने की मक्खी, बैक्टरियल स्टाक राट, ब्लू बीटल, चने की इल्ली, मोजेक, सोयाबीन ग्रीन सेमीलूपर से पौधों को होने वाले नुकसान, लक्षण एवं निदान के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही विस्तार कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र में आने वाली कीट एवं रोगों के संंबंध में पूछे गए प्रश्नों का भी निदान किया गया।
सस्य वैज्ञानिक डॉ. मेघा दुबे ने खरीफ मौसम में होने वाले खरपतवार के लक्षण एवं उपचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की खरपतवार से संबंधित समस्या की जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र में दें। साथ ही नाइट्रोजनी जैव उर्वरक राइजोबियम, एजोक्टोबेक्टर, क्लास्ट्रिडियम, रोडो स्पाइरिलम एवं एजोस्थाइरूलम के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के अनुविभागीय कृषि अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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