
कटनी में पूर्व वर्षों में भी हजारों पौधे रोपित किए गए , वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने सरकारी संस्थानों और सरकारी जमीनों में भी पौध रोपण किया करवाया क्या वो रोपित पौधों की सुरक्षा की गई उनका पोषण सही तरीके से किया गया और यदि किया गया तो कितने जीवित कितने समाप्त हो गए ? क्या यही मानवता है कि पौध रोपण करके घर चले जाओ बचे तो हमने लगाया नहीं बचे तो मवेशी चर खा गए ?
जवाब तो बनता है

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