
🇮🇳🇮🇳पूरे देश में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है।आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश में उत्सव का माहौल है।हर घर तिरंगा लहराने की तैयारी में सभी लोग जुटे हैं।ऐसे में देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सच्चे सपूतों व वीरों को याद करना भी जरुरी है।जिन्होंने देश को व समाज को एक नई दिशा दी। आज हम बात करेंगे पूर्व के लेनिन,महराजगंज के मसीहा ,धरती के नेता जैसे कई नामों से प्रसिद्ध प्रोफेसर सिब्बन लाल सक्सेना की।एक ऐसा नेता जिसने जनसेवा के लिए अपने संपूर्ण जीवन का त्याग किया,एक ऐसा नेता जिसने जनता की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया । अंग्रेजों के आगे कभी झुके नहीं, रुके नहीं, हमेशा फौलाद की तरह अडिग रहे सिब्बन लाल सक्सेना।
सिब्बन लाल सक्सेना का जीवन ही संघर्षो भरा था।इनका जन्म 13जुलाई1906 को अपने मामा के घर आगरा में हुआ था।इनके पिता का नाम श्री छोटेलाल सक्सेना था जो पोस्टमास्टर थे। इनकी माता का नाम ‘बिट्टी रानी’ था। चाचा का नाम श्यामसुंदर लाल सक्सेना एवम रामसुंदर लाल सक्सेना था । आप बरेली में आवला तहसील, बल्लिया नामक गाँव के मूल निवासी थे। शिब्बनलाल का परिवार अपने समय में बल्लिया का एक समृद्ध परिवार था जिसकी वजह से उसका गाँव में काफी सम्मान था।सात साल की उम्र में इनकी माता व नौ साल की उम्र में इनके पिता का देहांत हो गया।शिब्बनलाल और उनके दो छोटे भाई-बहन होरीलाल और प्रियंवदा को उनके मामा दामोदार लाल सक्सेना ने सहारा दिया और अपने साथ कानपुर ले गये जहाँ पर वह स्वयं वकालत करते थे। शिब्बनलाल की प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा कानपुर के शासकीय हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च इण्टर कॉलेज, और डीएवी कॉलेज में हुई। वे प्रारम्भ से ही काफी मेधावी छात्र रहे थे जिसके फलस्वरूप उन्होने अपनी सारी परीक्षाएँ न केवल प्रथम श्रेणी में बल्कि स्वर्ण पदक के साथ उत्तीर्ण की थीं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिब्बनलाल ने 1927 में अपनी बी. ए. की परीक्षा गणित और दर्शनशास्त्र विषयों के साथ स्वर्ण पदक के साथ उत्तीर्ण की। 1929 में इन्होंने एम. ए. की परीक्षा स्वर्ण पदक प्राप्त करते हुये गणित विषय के साथ उत्तीर्ण की। सन् 1930 में शिब्बनलाल गोरखपुर के सेन्ट एण्ड्रूयूज कालेज में गणित के प्रवक्ता के रुप में नियुक्त हुये और 1931 में उन्होने आगरा विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र विषय से एम. ए. की डिग्री ली।
शिब्बन लाल सक्सेना पेशे से डिग्री कालेज के अध्यापक थे। 1932 में महात्मा गांधी के आह्वान पर अध्यापन त्यागकर पूर्ण रुप से राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा लिया। उन्होंने महराजगंज के किसानों -मजदूरों की सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए कार्य किया।जब सक्सेना गोरखपुर में प्रवक्ता नियुक्त हुए थे उसी समय महात्मा गांधी एक सभा में भाषण देने के लिए गोरखपुर आए हुए थे। गांधी जी से उनकी पहली मुलाकात यहीं हुई और गांधी जी ने उन्हें कांग्रेस में आने की सलाह दी जिसे शिब्बनलाल ने स्वीकार कर लिया।
इनके समय महराजगंज गोरखपुर जिले का अत्यंत पिछड़ा इलाका था।घने जंगलो से आच्छादित नेपाल की तराई में स्थित यह क्षेत्र शिक्षा,विकास से बहुत दूर था।ऐसे में सिब्बन लाल सक्सेना ने महाराजगंज जाकर लोगों को एक करने का बीड़ा उठाया और अपने प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर महराजगंज के उत्थान में लग गए🇮🇳🇮🇳।

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