Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 19, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

राजस्थान के सीकर स्थित खाटू श्याम मंदिर में भगदड़ की खबर सामने आई है। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। खाटू श्याम मंदिर में हर महीने एक मेला लगता है, इसी दौरान आज सुबह यहां पर भगदड़ मच गई, जिसमे 3 लोगों की मौत हो गई। भगदड़ में घायल दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इळाज चल रहा है। मौके पर पुलिस पहुंच गई है और राहत-बचाव का कार्य कर रही है।

बता दें कि राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी में लगने वाले मासिक मेले के दौरान अचानक से भगदड़ मच गई। सुबह 5 बजे जब मंदिर का प्रवेश द्वार खुला तो यहां लोगों की भारी भीड़ थी, जो बेकाबू हो गई और लोग आपस में धक्का-मुक्की करने लगे। इस दौरान मची भगदड़ में तीन महिला श्रद्धालुओं की मौत हौ गई। मृत महिलाओं में से अभी तक सिर्फ एक ही महिला की पहचान हो सकी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पुलिस प्रशासन की टीम पहुंची और राहत-बचाव का कार्य शुरू किया।

गौर करने वाली बात है कि सीकर में खाटू श्यामजी मंदिर देश के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। यह भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है, जिन्हें कलियुग का भगवान माना जाता है। यह मंदिर खाटू गांव में स्थित है, ऐसी मान्यता है कि श्याम बाबा के दरबार में लोग जो भी कामना करते हैं वह पूरी होती है। यही वजह है कि यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि खाटू श्याम की शक्तियों से ही खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में भी पूजे जाने का वरदान दिया था।

दरअसल जब पांडव वनवास पर निकले थे तो अपनी जान बचाने के लिए भटक रहे थे। इसी दौरान इनका सामना हिडिम्बा से हुआ। हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो भीम जैसी कद-काठी का था, उसका नाम घटोखा था। घटोखा का पुत्र बर्बरीक था। दोनों को वीरता के लिए जाना जाता था। जब कौरव व पांडवों के बीच युद्ध हुआ तो बर्बरीक भी युद्ध देखने के लिए पहुंचा। बर्बरीक से जब पूछा गया कि वह किसकी ओर है तो उसने कहा जो हारेगा वह उसक ओर से युद्ध करेगा। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण को इस बात का डर था कि कहीं यह पांडवों के विपरीत ना चला जाए, इसीलिए उन्होंने बर्बरीक से दान में शीश मांग लिया। हालांकि बर्बरीक ने अपना शीश दे दिया लेकिन उन्होंने अपनी आंखों से युद्ध को देखते की इच्छा जाहिर की।

भगवान श्रीकृष्ण ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और बर्बरीक के शीश को पहाड़ी पर रख दिया गया। बर्बरीक का कहना था कि श्रीकृष्ण की वजह से पांडवों को जीत हासिल हुई। इसी के बाद श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलियुग में श्याम के नाम से पूजे जाएंगे। मान्यता है कि खाटू गांव में ही बर्बरीक का सिर मिला था। मान्यता है कि यहां एक गाय के स्तन से दूध की धारा बहने लगी, जिसके बाद नीचे खोदा गया तो बर्बरीक का शीश मिला और इसी जगह पर खाटू श्यामजी मंदिर का निर्माण कराया गया।