विशाल भौरसे रिपोर्टर



जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अलगाव पैदा कर कुछ लोग/संगठन देश को तोड़कर, पाकिस्तान की तर्ज पर “भिलिस्तान” बनाने का षड्यंत्र चर रहे हैं. लेकिन, हमारे झाबुआ में पिछ्ले लगभग एक दशक में इतनी चेतना जाग्रत हुई है कि सारे षड्यंत्र धरे के धरे रह गए.
अब झाबुआ के जनजातीय बन्धु-भगिनियों ने ही वर्षों से लग रहे क्रिसमस मेले को निरस्त कर दिया है. बन्धुओं ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारा उत्सव तो “भगोरिया” है, क्रिसमस नहीं.
झाबुआ का ही जनजातीय समाज सड़कों पर आकर कह रहा है – “डी-लिस्टिंग” लागू करो. इंडिजिनस डे से हमारा क्या लेना देना, हम तो “बाबा बिरसा” के वंशज हैं, हमारा तो “जनजाति गौरव दिवस” है.
सावन में भव्य काँवड़ यात्रा से लेकर नवरात्रि में विशाल चुनरी यात्राओं के आयोजन हो रहे हैं.

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