इरम खान रिपोर्टर







आलीराजपुर हुसैनी अखाड़ा ग्रुप द्वारा मुर्गीबाजार में जम कर अखाड़े की शानदार प्रस्तुति दी गई, शहर काजी अफजल दादा एवं शहर काजी प्रभारी हनीफ दादा, असफाक दादा एवं मोहसीन बाबा इन्होंने अखाड़े वालो का हौसला अफजाई किया।
कत्ल तो हुसैन का हुवा था पर हारा यजीद। अगर विस्तार से समझे तो बस इतना ही काफी हे की “कहानी सिर्फ इतनी सी है की यजीद था और हुसैन है” आज भी हुसैन जिंदा है हमारे दिलों में। किसी ने बड़ा ही शानदार शेर अर्ज़ किया है की “कतले हुसैन असल में मर्गे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।” हुसैन की अजमत आज भी कायनात में कायम है। हुसैन की अजमत बया करता हुवा एक शेर बड़ा ही शानदार है की “जरा इंसान को बेदार तो होने दो, हर कोम पुकारेगी हमारे है हुसैन।” और इसी यकीं के साथ बुधवार सुबह 10 बजे हल्की बूंदा बांदी के साथ मातमी माहोल में अकीदतमंदों ने नम आखों से ताजियों को कर्बला के लिए विदा किया । अलग अलग मोहल्लों से ताजियादारो ने सादगी से ताजियों को रवाना किया।
साल भर निरोग रहने की भावना से छोटे बच्चों को ताजियों के नीचे से निकाला गया। अकीदतमंदो ने ताजियों पर खोपरे, सूखे मेवे, पतासे और हलवा – पूरी चढ़ाए। इमाम हुसैन की याद में मसिये भी पड़े गए। और फीर ताजियों को कर्बला में ठंडे करने ले गए। और सड़को पर या हुसैन की सदा गूंजी।
इस सब में पुलिस प्रशासन का बोहोत विशेष सहयोग रहा ।

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