


इंटरनेशनल गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजस्थान के पर्यटन विभाग कीवेबसाइट पर गलत जानकारी को तुरंत प्रभाव से सही किया जाना एवं संबंधित दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
हाल ही में भीलवाड़ा के आसींद कस्बे में सवाई भोज का विश्व विख्यात मंदिर है। यह मंदिर गुर्जर समाज की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। पर्यटन विभाग ने इस मंदिर की अपनी वेबसाइट पर जानकारी डाली है जिसमें लिखा कि ‘आसींद स्थित सवाई भोज मंदिर खारी नदी के बाएं किनारे पर स्थित है। यह बाघ राव के बड़े बेटे सवाई भोज द्वारा निर्मित है जो मेवाड़ राज्य के प्रथम श्रेणी के कुलीनों से एक थे। जिन्होंने राव का पद धारण किया था एवम उनको “चौहान गुर्जर” की बजाय सिसोदिया राजपूत के चूंडावत संप्रदाय से बताया गया है।
कर्नल देवानंद गुर्जर ने बताया कि लोक देवता भगवान श्री देवनारायण का जन्म आसींद के मालासेरी डूंगरी में संवत 968 ईस्वी को माही सप्तमी को हुआ था। भगवान देवनारायण के पिता महाराज सवाई भोज थे। सवाई भोज चौहान गौत्र के गुर्जर जाति से थे। पर्यटन विभाग द्वारा ऐसी गलती किया जाना गुर्जर समाज की भावना के साथ खिलवाड़ ही नहीं कहीं ना कहीं सम्मान को भी आघात पहुंचाने की दुर्भाग्यपूर्ण कार्रवाई बताया ।

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