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Dharmendra Singh

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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत


27 सितंबर 2022 जयपुर , बनी पार्क के सीकर रोड स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन के प्रांगण में छह दिवसीय आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम रखा गया . कार्यक्रम के पहले दिन के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर रहे . विशिष्ट अतिथि श्री केशव गुर्जर एवं फैकल्टी के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया.
मुख्य अतिथि का हाथों में तिरंगा लिए महिला एवं पुरुष विद्यार्थियों द्वारा भारत माता की जय के उद्घोष के बीच में राजस्थान की परंपरागत तिलक करने के साथ हुआ. श्री इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल फ्री प्रियदर्शन लखावत ने अपने प्रारंभिक उद्बोधन में मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए मौजूद विद्यार्थियों को आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए सरकार की उपलब्धियों को रखा. उसके पश्चात इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों द्वारा एक नाटक के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं हिंदी भाषा के उचित सम्मान में कमी का मुद्दा उठाया. कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती पूरी में मुख्य अतिथि का परिचय करवाया.
कर्नल देव आनंद ने अपने उद्बोधन के दौरान भारत के स्वर्णिम इतिहास ,मुगल आक्रांता ओं के अत्याचार, अंग्रेजों द्वारा संस्कृति पर प्रहार एवं अखंड भारत की पहली सरकार के प्रधान मंत्री सुभाष चंद्र बोस एवं इंडियन नेशनल आर्मी के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए बताया की आज के युवाओं को सुभाष चंद्र बोस एवं इंडियन नेशनल आर्मी के सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेते हुए नए भारत को नई ऊंचाई तक ले जाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाए जहां पर राष्ट्र प्रथम एवं बलिदान यों को सम्मान सबसे सर्वोपरि हो. भारत के विभाजन पश्चात देश की सुरक्षा मे कमी एवं देश को विदेशी आक्रांता ओं से मुक्त कराने वाले बलिदानीयों को उचित सम्मान नहीं दिए जाने जैसी गलतियों के मौजूदा सरकार द्वारा सुधार किए जाने की प्रशंसा करते हुए देश के लिए जीवन का बलिदान देने वाले योद्धाओं के सम्मान में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया जाना, इंडिया गेट पर सुभाष बाबू की मूर्ति, एवं भारतीय जल सेना के झंडे में गुलामी मानसिकता के प्रतीक लाल क्रॉस हटाए जाने राजपथ का नाम कर्तव्य पथ जैसे अनेक बदलावों की प्रशंसा करते हुए मौजूदा सरकार की तारीफ करते हुए बताया कि अब बचे हुए गुलामी के प्रतीकों को भी हटाने की मुहिम तेज होनी चाहिए .
उद्बोधन के पश्चात नायक भगवान सिंह की वीरांगना पत्नी को इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल द्वारा शॉल एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया