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Dharmendra Singh

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March 22, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

एस पाटीदार रिपोर्टर

पुण्य सलिला मां नर्मदा के उत्तरी पर 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्री धाम बालीपुर में आस्था ,श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक अंबिका आश्रम में संत का अवतरण दिवस मनाया गया ।सर्व प्रथम गणेश जी की वंदना की । गुरु का ध्यान लगाया।तत्पश्चात रुद्राभिषेक किया गया। गुरु के भजनों को खुब गायन किया गया। राष्ट्र के प्रति समर्पित भावना और राष्ट्र को रोगो से मुक्त करने हेतु प्रति दिवस यज्ञ किया जाता है। यज्ञ मे सभी प्रकार की आहुतियाॅ दी जाती है। वे आयुर्वेदाचार्य के महान ज्ञानी तथा धर्माचार्य में अहम भूमिका है ।
जीवन मे संत का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है ।वह हमारे जीवन का निर्माण करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके शब्दों से नई दिशा और दशा मिलती है। हमारी जिंदगी संवर जाती है । श्री धाम बालीपुर मे उनको गुरू की संज्ञा दी गयी है।गुरू ही जीवन का आधार है ।गुरु बिना जिंदगी में मझधार में है। सनातन संस्कृति एवं हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार एकादशी पापांकुशा में “अवतरणदिवस “का काफी महत्व होता है। इस धरती पर एकादशी के जन्म होने से ज्योतिषी होते हैं। तथा न्याय के रास्ते पर मनुष्यो को मार्ग दिखा कर न्याय की बात करते हैं और दूसरों को शिक्षा देकर उनके विचार शुद्ध करवाते हैं। उनका ह्रदय बड़ा पवित्र और कोमल होता है।
संत जी बहुत ही विनम्र और ज्ञानी हैं ।संत समाज में सम्मान पाते है और सदाचारी रहते हैं। श्री सुधाकर जी महाराज ज्योतिषी विद्या से आदमी देखकर कुंडली बता देते है। महाभारत काल में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एकादशी को जन्म देने वाले संतों की महिमा का वर्णन किया है ।
” शुभ तव अवतरण दिवस सर्वमंगलम।
जय -जय -जय तव सिद्ध साधनम्।
शतायु: ईश्वर: सदा त्वाम च रक्षतु।
भवतु मंगलम जन्म दिवसस्य। ।
सुदिनम सुदिना ” अवतरण दिवस: ” तव।”
संत जी को संस्कृत अति प्रिय है तथा लोगों को सिखाते भी हैं। वे 55 वर्ष के हो गए हैं । बिना आहार लिए अपनी जीवन लीला बाबा सब के पद चिन्हों पर चलते हुए निभा रहे हैं। प्रतिदिन संध्या, जप, पूजन कीर्तन और यज्ञ में समय बिताते है ।तथा रोगीयो को ठीक करने के लिए उपचार करते हैं ,दवाई देते हैं ।उनके अवतरण दिवस पर फलियारी खिचड़ी, शुद्ध खोपरा पाक एवं हलवे की प्रसादी खिलाई गई। उक्त जानकारी सदगुरुदेव समिति के जगदीश चंद्र पाटीदार अध्यापक दी।