एस पाटीदार रिपोर्टर



नानी बाई को मायरो भक्त नरसी मेहता की भगवान कृष्ण की भक्ति पर आधारित कथा है। गीता ज्ञान प्रचारक समिति के तत्वाधान में आयोजित रात्रि कालीन नानी बाई को मायरो कथा के कथावाचक ब्रम्हचारी बेन जीवन लता खेड़े मुन्दी खण्डवा ने बताया कि कथा के प्रथम दिवस पर मायरो जोकि मामा द्वारा कन्या को उसको शादी में दिया जाता है । नानी बाई नरसी की पुत्री थी। यह हमारी मातृभूमि संतो और मंदिरों की भूमि है। यहां पर कई संतों का जन्म हुआ उनका ईश्वर की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि दूसरों का जीवन मे भी प्रकाश भरते है।ब्राह्मण समाज में जन्मे नरसी मेहता महान भक्त होते हुए साधुओं की सेवा में बढा आनन्द आता था। घर का त्याग कर जंगल में भक्ति से कृष्ण ने शिव के कराये। स्वयम भगवान श्री कृष्ण एवम नरसी मेहता मायरा लेकर शादी में गए। अमरनाथ गुफा में शिव जी ने पार्वती को जो कथा सुनाई थी तथा पार्वती के निन्दरासन मे हंकारे भरे थे।उसी के अनुरूप जीवन लता खेडे के हुंकारे भर कर दर्शको को हंसा -हंसा कर लौट – पौट कर दिए। रात्रि कालीन कथा में यजमान संजय अग्रवाल निरूपमा धर्मपत्नी सहित, पिंकी, मीना,रानी,माधुरी,विधि मीरा रमेश चंद्र गोयल ,अमित शर्मा, राजू शर्मा, एवं मातृ शक्तियों का इस कथा में बहुत बहुत सहयोग रहा।

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