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Dharmendra Singh

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April 1, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन इसी महीने के आखिर में मिलने लगेगी, संपर्क में कई राज्य और अस्पताल राहत की बात ये है कि इस महीने के आखिर तक बाज़ार में एक और वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी. .

इस महीने के अंत तक बाजार में होगी स्पुतनिक वी
कई राज्य, अस्पताल कंपनी से कर रहे बात
कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहे भारत के पास अब वैक्सीनेशन ही एक मात्र उपाय है. देश में इस वक्त दो वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है, दोनों ही देसी वैक्सीन हैं. अब राहत की बात ये है कि इस महीने के आखिर तक बाज़ार में एक और वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी. रूस की स्पुतनिक-वी को भारत पहले ही मंजूरी दे चुका है, यहां पर पहली खेप पहुंच भी गई है और अब महीने के अंत तक ये कई राज्यों को उपलब्ध करा दी जाएगी. रूस द्वारा तैयार की गई स्पुतनिक-वी को लेकर भारत में हैदराबाद की डॉ. रेड्डी लैब्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट है. ऐसे में कई राज्य सरकारें, प्राइवेट अस्पताल अभी दामों, उपलब्धता और अन्य मसलों पर डॉ. रेड्डी लैब्स से बात कर रहे हैं. बता दें कि भारत में एक मई को स्पुतनिक-वी की कुल 1.5 मिलियन डोज़ आ गई थीं. जबकि इतनी ही डोज़ की एक और सप्लाई मई के आखिरी हफ्ते तक भारत पहुंचेगी. भारत को जुलाई तक स्पुतनिक-वी की कुल 18 मिलियन डोज़ मिलनी हैं, जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कारगर साबित होंगे. इनमें मई में 3 मिलियन, जून में 5 मिलियन और जुलाई में 10 मिलियन डोज़ आनी हैं. गौरतलब है कि वैक्सीनेशन के इस चरण में राज्य सरकारें और प्राइवेट अस्पताल सीधे वैक्सीन निर्माताओं से वैक्सीन ले रहे हैं. ऐसे में सभी राज्य सरकारें और प्राइवेट अस्पताल अपनी-अपनी ओर से ही डील करने में जुटे हुए हैं.अभी धीमी है वैक्सीनेशन की रफ्तार… बता दें कि भारत में अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन का ही इस्तेमाल हो रहा है. 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए टीकाकरण शुरू होने से वैक्सीनेशन की मांग अचानक बढ़ गई है, ऐसे में देश के कई राज्यों में टीकाकरण धीमा हो गया है. कई राज्य अभी भी 18 से अधिक उम्र वालों के लिए टीकाकरण शुरू नहीं कर पाए, जबकि कुछ राज्यों में सिर्फ चंद ही स्लॉट उपलब्ध करवाए गए हैं. स्पुतनिक-वी से इतर कोविशील्ड, कोवैक्सीन की सप्लाई की रफ्तार भी अभी धीमी है, ऐसे में माना जा रहा है कि जुलाई तक सभी राज्यों को वैक्सीन की सप्लाई में कुछ हदतक तेज़ी आ सकती है. भारत में अबतक कुल 17 करोड़ से अधिक डोज़ लग चुकी हैं.